Old Testament
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यिर्मयाह 1 यिर्मयाह 2 यिर्मयाह 3 यिर्मयाह 4 यिर्मयाह 5 यिर्मयाह 6 यिर्मयाह 7 यिर्मयाह 8 यिर्मयाह 9 यिर्मयाह 10 यिर्मयाह 11 यिर्मयाह 12 यिर्मयाह 13 यिर्मयाह 14 यिर्मयाह 15 यिर्मयाह 16 यिर्मयाह 17 यिर्मयाह 18 यिर्मयाह 19 यिर्मयाह 20 यिर्मयाह 21 यिर्मयाह 22 यिर्मयाह 23 यिर्मयाह 24 यिर्मयाह 25 यिर्मयाह 26 यिर्मयाह 27 यिर्मयाह 28 यिर्मयाह 29 यिर्मयाह 30 यिर्मयाह 31 यिर्मयाह 32 यिर्मयाह 33 यिर्मयाह 34 यिर्मयाह 35 यिर्मयाह 36 यिर्मयाह 37 यिर्मयाह 38 यिर्मयाह 39 यिर्मयाह 40 यिर्मयाह 41 यिर्मयाह 42 यिर्मयाह 43 यिर्मयाह 44 यिर्मयाह 45 यिर्मयाह 46 यिर्मयाह 47 यिर्मयाह 48 यिर्मयाह 49 यिर्मयाह 50 यिर्मयाह 51 यिर्मयाह 52Verse
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यिर्मयाह 42:14 — क्यों यह वचन मायने रखता है
यह पद यहूदियों के लिए एक निर्णायक मोड़ है। प्रचारकों और भविष्यवक्ताओं की सलाह पर न चलकर, वे अपने ही निर्णय से बचने के लिए यहोवा की दिशा को चुनौती देते हैं। यह स्पष्ट करता है कि परमेश्वर की योजना कभी-कभी भय और असुविधा के समय में भी चलती है, ताकि His people वाचा के अनुरूप आचरण करें, भले ही परिस्थितियाँ प्रतिकूल क्यों न हों।
पार्श्व संदर्भों में मूल संदर्भ
यिर्मयाह prophet Jeremiah ने बाबुल के आक्रमण और बनावट की भिन्न-भिन्न धारणाओं के बीच यहूदियों को भविष्यवाणी दी कि वे भाग नहीं जाएँगे बल्कि यहोवा पर भरोसा रखें। 42:14 में यहूदियों से कहा गया है कि जब तक वे युद्ध, नरसिंगे शब्द और भोजन की कमी से सुरक्षित नहीं रहते, तब तक वे अन्यायपूर्ण विकल्प न चुनें और पथभ्रष्ट न हों। यह संदेश उन लोगों के लिए था जो अपनी सुरक्षा के लिए सैन्य सहायता, सशस्त्र बलों या गलत आशाओं पर निर्भर रहते थे।
मुख्य संदेश
सहयोगी बाइबल विचार
यहाँ तीन प्रमुख थीम मिलती है: भरोसा बनाम भय, समय‑सारिणी पर परमेश्वर की योजना, और समुदाय की एकजुटता। यह विचारदान हमें दिखाते हैं कि चूँकि भीषण परिस्थितियाँ आती हैं, प्रभु के परे कोई सुरक्षा नहीं; परन्तु यह भी कि उनका आशीर्वाद उन पर बना रहता है जो उसी पर निर्भर रहते हैं।
क्रॉस‑रेफरेंस और उनके छोटे से निष्कर्ष
- यिर्मयाह 17:7-8: भरोसा परमेश्वर पर रहने की blessing। यह बताता है कि निर्भरता किस प्रकार शांति और फल दे सकती है।
- यशायाह 41:10: परमेश्वर के साथ निर्भय होना, क्योंकि वह हमारे साथ है और हमारी सहायता करेगा।
- निर्गमन 14:14: यह बताता है कि यहोवा लड़ाई लड़ेगा, और हमें चुप्पी में रहने को कहा गया है, ताकि उसकी महिमा दिखाई दे।
एकत्वपूर्ण devotional विचार
जब भय द्वार खोल देता है, तब भी परमेश्वर हमें बुलाते हैं—"यहोवा का यह वचन सुनो"। क्या आप भी असुरक्षा के क्षणों में एक स्थिर विश्वास बनाये रखते हैं? चाहे युद्ध की ध्वनि आस-पास हो या भोजन की कमी का खतरा हो, परमेश्वर की अवस्था और विश्वासयोग्य वचन ही हमें सांत्वना और मार्ग दिखाते हैं। यह verse हमें याद दिलाता है कि कठिनाइयों के बीच भी चरित्र-निर्माण का अवसर होता है—जो विश्वास में दृढ़ रहता है, वही अंततः स्वयं भी और समुदाय भी सुरक्षित पाते हैं।
संक्षिप्त निष्कर्ष
यिर्मयाह 42:14 यहोवा के निर्देश के प्रति श्रद्धा और आत्म-निश्चय की मांग करता है। भय के कारण अस्थिर निर्णय से बचना चाहिए और एक समुदाय के रूप में एकत्रित होकर परमेश्वर के मार्ग पर चलना चाहिए, ताकि भविष्य में उसकी योजना स्पष्ट रूप से निर्मित हो सके।
अनुदेशात्मक उद्धरण (जहाँ उपलब्ध)
टिप्पणीकारों से संक्षेपित विचार: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन Commentary में इस प्रकार के संदेश मिलते हैं—परमेश्वर के वचन पर स्थिर आश्रय बनाये रखें; भय के समय भी यहोवा की योजना मान्य रहती है; और यह समय समुदाय के लिए परीक्षा बन जाता है ताकि वे एकात्म रहें।