Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मत्ती 12:1 मत्ती 12:2 मत्ती 12:3 मत्ती 12:4 मत्ती 12:5 मत्ती 12:6 मत्ती 12:7 मत्ती 12:8 मत्ती 12:9 मत्ती 12:10 मत्ती 12:11 मत्ती 12:12 मत्ती 12:13 मत्ती 12:14 मत्ती 12:15 मत्ती 12:16 मत्ती 12:17 मत्ती 12:18 मत्ती 12:19 मत्ती 12:20 मत्ती 12:21 मत्ती 12:22 मत्ती 12:23 मत्ती 12:24 मत्ती 12:25 मत्ती 12:26 मत्ती 12:27 मत्ती 12:28 मत्ती 12:29 मत्ती 12:30 मत्ती 12:31 मत्ती 12:32 मत्ती 12:33 मत्ती 12:34 मत्ती 12:35 मत्ती 12:36 मत्ती 12:37 मत्ती 12:38 मत्ती 12:39 मत्ती 12:40 मत्ती 12:41 मत्ती 12:42 मत्ती 12:43 मत्ती 12:44 मत्ती 12:45 मत्ती 12:46 मत्ती 12:47 मत्ती 12:48 मत्ती 12:49 मत्ती 12:50



मत्ती 12:19 के संदर्भ में टिप्पणी
इस व verse में यीशु मसीह की प्रकृति और उनकी मेल-जोल की शैली स्पष्ट है। वे धार्मिक दबावों और भीड़-भाड़ के बीच में सहज रहे, परन्तु सत्य preaching का लक्ष्य कभी पीछे नहीं पडा। वह न झगड़ा करेगा, और न चिल्लाएगा; और न बाजारों में कोई उसका शब्द सुनेगा—यह वर्णन यीशु के विनम्र स्वभाव और शांत अधिकार को उजागर करता है। यह उद्धृत भाग आशय में उसे एकदम धैर्यवान, संयमी, और मानवीय रूप में प्रस्तुत करता है, जो हर प्रकार की लड़ाई से ऊपर है, परन्तु सत्य की बात बिना हिचकिचाहट कहता है।
मुख्य अर्थ
कुल मिलाकर वचन बताता है कि मसीह शासन में शक्ति के साथ सम्मिलित शांति बनाए रखते हैं। वे मजबूरी, बदनामी, या उन्मादपूर्ण प्रतिक्रिया से नहीं बचते, बल्कि अपनी शांतिपूर्ण आचरण से सत्य और दया दोनों दिखाते हैं। यह दृष्टिकोण हमें यह सिखाता है कि प्रभु के अनुयायी भीड़-भाड़ या आलोचनाओं के समय धैर्य और विनम्रता रखें, न कि आवेश में आकर प्रतिक्रिया दें।
दो मुख्य थीम
संवद्ध अंश (cross-references)
1) याकूब 1:19— “जगह-जगह से तेज़-स्वर नहीं, बल्कि सुन्न और सोच-विचार कर बोलना चाहिए।” यह हमारे लिए प्रेरणा देता है कि प्रतिक्रिया में विचारशीलता और संयम बनाए रखें।
2) मरकुस 12:28-31—Jesus's teaching on love and neighbor, highlighting restraint in confrontation and focus on love as primary command.
3) प्रेरितों के काम 20:24—Paul’s emphasizing that life is for testifying to the gospel with humility and steadfastness.
व्यावहारिक विचार
हम किस प्रकार अपने व्यवहार में यीशु के मॉडल का अनुकरण कर सकते हैं? कठिन स्थिति में शांत बना रहना, नकारात्मक भावनाओं को नियंत्रण में रखना, तथा सच बोलना जो प्रेम और सत्य के समन्वय को बनाए रखे। यह दृष्टिकोण इंसान-समाज के बीच विश्वास को गहरा करता है और प्रगट करता है कि ईश्वर का राज्य क्रोध से नहीं, बल्कि न्याय और करुणा से चलता है।
छोटी सी समापन समीक्षा
इस वचन में यीशु का आचरण एक संतुलित शक्ति के रूप में प्रस्तुत है—शक्ति जो विनम्रता और सत्य के साथ जुड़ी है। यह हमें स्मरण कराता है कि धर्मशास्त्र की बातों को भी शांत और प्रेमपूर्ण तरीके से प्रस्तुत करना प्रभावशाली है, ताकि लोग प्रभु के पास लौट आएं।
सूत्र-स्त्रोत और मुक्त-आइडिया (कमज़ोर नहीं, पर बहुधा उद्धृत)
यदि आपMatthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke की संक्षिप्त विचार-रेखाओं को देखना चाहें, तो वे सामान्यतः यीशु के विनम्र आचरण और निष्कपट प्रस्तुतिकरण पर बल देते हैं—यह वही पैटर्न इस verse में भी दिखता है।