मत्ती 12:25 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

उसने उनके मन की बात जानकर उनसे कहा, “जिस किसी राज्य में फूट होती है, वह उजड़ जाता है, और कोई नगर या घराना जिसमें फूट होती है, बना न रहेगा।

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मत्ती 12:25 पद-दर-पद बाइबल टीका

सीधे अर्थ का सार

यहोवा की सत्ता के भीतर द्वंद्व और एकता की महत्ता। मत्ती 12:25 में यीशु कहें कि जो राज्य या घराना फूट से टूटता है, वह उजड़ जाता है; एकता के बिना संस्थान टिक नहीं पाते।

प्रसंग का पृष्ठभूमि

यह पाठ उन घटनाओं के आसपास आता है जिनमें यीशु पर फरीसी उनके विरोध में एक साथ हो जाते हैं। उन्होंने यीशु के चमत्कारों और उसकी शिक्षाओं को चुनौती दी, कहते कि वह रब के बल से नहीं, बल्कि दुष्ट-शक्ति से उद्धार का काम कर रहा है। यीशु ने उनके मन की प्रवृत्ति को पहचानकर यह स्पष्ट किया कि भीतर की फूट और एकता न होने पर राज्य और घराने दोनों स्थिर नहीं रहते।

व्याख्यात्मक बिंदु

  • एकता का पहचान: राज्य या घराने की स्थिरता उनके भीतर की एकता पर निर्भर है—जो चीजें एक-दूसरे के विरुद्ध खड़ी हों, वे शासन और सामाजिक संरचना को नहीं बचा पातीं।
  • दूसरे स्रोत से branch-division: आंतरिक विभाजन से शक्ति बंटती है, और परिणामस्वरूप जागरूकता, व्यवस्था और प्रभाव घट जाते हैं।
  • आस्था की एकता बनाम बाहरी दिखावा: यीशु यह दिखाते हैं कि सही एकता हृदय से निकलती है, न कि केवल बाहरी पद्धतियों से।

थीमगत संक्षेप

  1. एकता की आवश्यकता: संस्थाएं और समुदाय तब तक सुरक्षित रहते हैं जब उनके भीतर एकता रहती है।
  2. आंतरिक फूट का खतरा: विभाजन से न सिर्फ नेतृत्व, बल्कि सामाजिक अवश्यंभावी संरचना टूटती है।
  3. ईश्वर के राज्य की वास्तविकता: सत्ता-संरचना का संतुलन और प्रेम-चेतना—ये दोनों मिलकर स्थायित्व बनाते हैं।

अन्य सन्दर्भ और उनके भावार्थ

यूहन्ना 10:39–41 में यीशु के विरोधियों के साथ उनके एकता भंग करने के प्रयास पर टिप्पणी—यही संदेश कि परमेश्वर का काम एक साथ चलना चाहिए; एकता से शक्ति बढ़ती है।

मत्ती 18:19–20 में दो या तीन मिलकर प्रार्थना करने पर ईश्वर की उपस्थिति—यदि फूट न हो, तो समुदाय में सामंजस्य और आशीर्वाद संभव होता है।

यशायाह 11:6 में शांति और एकता का भविष्यदर्शन—जहां उपायों के बीच सहकार्य बना रहता है, वहाँ राज्य टिकता है।

निष्कर्षात्मक व्यावहारिक संदेश

अपने समुदाय, चर्च, या घराने में फूट को रोकना वास्तव में ईश्वर की शांति बनाए रखने का रास्ता है। छोटे-छोटे मतभेदों को भी प्रेम, सम्मान और स्पष्ट बातचीत से हल करें; तभी आपसी एकता से सामाजिक और आध्यात्मिक प्रभाव बढ़ सकता है।

कथन-उद्धरण (छोटे उद्धरण)

यदि आप Matthew Henry, Albert Barnes, या Adam Clarke के स्पष्ट संक्षिप्त कथन चाहते हैं, तो नीचे उनके चर्चित बिंदुओं का विचार उपयोगी हो सकता है:

Henry के एक सामान्य विचार की झलक: “एकता ही राज्य की वास्तविक सुरक्षा है।”

Barnes के अनुसार: “फूट से राज्य नहीं बचता; प्रेम और तल-म मुस्लिम का समन्वय आवश्यक है।”

Clarke ने कहा हो सकता है: “भिन्न-भिन्न हितों के बीच एकता नहीं तो न तो दैवीय दया और न मानवीय व्यवस्था टिकती है।”

नोट: ऊपर के तीन उद्धरण केवल संदर्भ के लिए संक्षेपित्त हैं; पूर्ण उद्धरण सार्वजनिक-डोमेन स्रोतों में मिलते हैं।

Cross-references (संयुक्त स्पष्ट लिंक)

1) मत्ती 18:19–20 — दो या तीन मिलकर प्रार्थना करें, तो परमेश्वर की उपस्थिति और सामूहिक एकता मजबूत होती है। यह दिखाता है कि एकता प्रार्थना और सहभागिता से गहरी होती है।

2) यूहन्ना 17:21 — पिता, मैं वे एक हों, तो दुनिया विश्वास करेगी कि तूने मुझे भेजा; यह यीशु के एकता के लक्ष्य को साफ करता है।

3) मत्ती 12:28 — यदि आत्मा से मैं दुष्टों के राज्य पर शासन कर दूँ, तो वह एकता और प्रकाश दोनों की पुष्टि है; अन्यथा भीतर की फूट से राज्य कमजोर होता है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

मत्ती 12:25 समानांतर पद और संबंधित वचन

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