Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
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मत्ती 12:27 — पाठ का तात्कालिक संदर्भ
यह पद उस समय का है जब यीशु ने शैतानी शक्तियों पर उनकी सत्ता के प्रमाण प्रस्तुत करते हुए विरोधियों के तर्कों को चुनौती दी। वे कहते हैं कि यदि मैं शैतान की सहायता से दुष्टात्माओं को निकालता हूँ, तो तुम्हारे वंश किसकी सहायता से निकालते हैं? इस बात से स्पष्ट है कि ईश्वर के राज्य के विरुद्ध शक्ति के उपकरण कभी न चले जाएँ; जो उन्हें बाहर निकाले, वही भीतर से उद्धार और चंगा कर सकता है।
यह पाठ ईश्वर, विश्वास और तर्क का क्या खुलासा करता है
यह-विवाद ईश्वर की संप्रभुता और यीशु के दायित्व की स्पष्टता दर्शाता है: जब उद्धारक भीतर से काम करता है, तो उसकी सत्ता शैतान के विरुद्ध निर्णायक है। यदि दुष्टात्माओं को निकालना शैतान के द्वारा हो, तो यह असंगत होगा कि शैतान अपने ही राज्य के विरुद्ध काम करे। यीशु स्पष्ट करते हैं कि उनके शक्तिशाली काम का आधार ईश्वर का शासन है—यही कारण है कि उनके द्वारा निकाले गए दुष्टात्मा एक दूसरे से व्यवस्थित रूप से लड़ते हैं, न कि शैतान के भीतर अंतर्द्वंद्व का निष्कर्ष। इसे विश्वास के लिए एक स्पष्ट संकेत माना जाता है कि यीशु परमेश्वर के राज्य का भाग है, न कि शैतान का सहयोगी।
महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की स्पष्टता
संबंधित आयतें (Cross-references)
1) मत्ती 10:25 — यीशु कहता है कि यदि वे मुझे अपने गुरु के रूप में ध्वस्त करते हैं, तो वे मुझे भी गलत नहीं ठहरा सकते। यह संकेत देता है कि वास्तविक कारण सत्ता के स्रोत की पहचान है।
2) मर्कुस 3:22-27 — विपक्षी कहते हैं कि यीशु शैतान पर शासन करता है, पर यीशु प्रमाणित करते हैं कि राज्य विभाजन पर टिक नहीं सकता; शुद्ध दमन से उद्धार संभव होता है।
3) लूका 11:18-20 — यदि शक्तियाँ आपस में विभाजित हों, तो उनका राज्य बन नहीं सकता; फिर यीशु का कार्य ईश्वर के राज्य के प्रतीक के रूप में स्पष्ट हो जाता है।
आज के लिए आवेदन
- विश्वास करते समय यह स्पष्ट हो कि उद्धार का आधार ईश्वर की सत्ता है, न कि अलग-अलग उपायों या तर्कों पर। यीशु के माध्यम से चंगा होना ईश्वर के राज्य के भीतर प्रवेश है, न कि शैतान के प्रभुत्व के विरुद्ध एक द्वंद्व का परिणाम।
- आत्म-चेतना: अगर हम किसी समस्या के समाधान को किसी अन्य शक्तियों के सहारे देखते हैं, तो हमें यह याद रखना चाहिए कि ईश्वर किसी भी कसौटी पर टिके बिना प्रेरित करते हैं—उसके मार्ग में ही मार्ग है।
एमेज़ित उद्धरण (public-domain comentarियों से संकलित): Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सत्यापित संकलनों से स्रोत-वाक्यों के छोटे अंश पंक्तियों रूप में उद्धरणों के रूप में शामिल हो सकते हैं।
संरचना का सार
यह पाठ बताता है कि यीशु के उद्धार कर्म की शक्ति ईश्वर की सत्ता से आती है। यदि उद्धारक शैतान के साथ टकराए, तो वह अपने ही राज्य को समाप्त कर देगा; परन्तु उसके कार्य से बतला कि वह ईश्वर के राज्य का प्रमुख है। इसलिए शास्त्र-न्याय के अन्तर्गत सच का सञ्चार होता है और विश्वासियों के लिए यह एक स्पष्ट संकेत है कि यीशु परमेश्वर के दूत हैं।