Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मत्ती 12:1 मत्ती 12:2 मत्ती 12:3 मत्ती 12:4 मत्ती 12:5 मत्ती 12:6 मत्ती 12:7 मत्ती 12:8 मत्ती 12:9 मत्ती 12:10 मत्ती 12:11 मत्ती 12:12 मत्ती 12:13 मत्ती 12:14 मत्ती 12:15 मत्ती 12:16 मत्ती 12:17 मत्ती 12:18 मत्ती 12:19 मत्ती 12:20 मत्ती 12:21 मत्ती 12:22 मत्ती 12:23 मत्ती 12:24 मत्ती 12:25 मत्ती 12:26 मत्ती 12:27 मत्ती 12:28 मत्ती 12:29 मत्ती 12:30 मत्ती 12:31 मत्ती 12:32 मत्ती 12:33 मत्ती 12:34 मत्ती 12:35 मत्ती 12:36 मत्ती 12:37 मत्ती 12:38 मत्ती 12:39 मत्ती 12:40 मत्ती 12:41 मत्ती 12:42 मत्ती 12:43 मत्ती 12:44 मत्ती 12:45 मत्ती 12:46 मत्ती 12:47 मत्ती 12:48 मत्ती 12:49 मत्ती 12:50



सीधे अर्थ का वर्णन
मत्ती 12:10 में यीशु के समक्ष एक सूखा हाथ वाला व्यक्ति है; फिलिस्तीनी धार्मिक नेताओं ने उसे तौलते हुए देखा कि क्या शब्त के दिन चंगा करना उचित है। आखिर उन्होंने यीशु से जवाब माँगा, ताकि वह उस पर दोष लगा सकें। परन्तु यह घटना इस बात को उजागर करती है कि परमेश्वर के नियम और करुणा के बीच संतुलन कैसे बनता है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह स्थल शब्त के नियम पर बहस का हिस्सा है। यीशु ने पहले चंगा कर दिखाकर अपने साक्ष्य को क्रियात्मक बना दिया था: शब्त के दिन मानवीय जीवन और दया अधिक महत्त्वपूर्ण है—यहाँ यह स्पष्ट है कि धार्मिक कठोरता से compassion पीछे नहीं हटती। मत्ती के Gospel में इस घटना के साथ यीशु के पुराने धार्मिक ताने-बाने पर कटाक्ष और नए अभ्यास की स्थापना दिखती है: परमेश्वर का हृदय, नियम के पीछे नहीं बल्कि जीवित उद्धार के लिए है।
व्याख्यात्मक विचार
संयुक्त दृष्टिकोण (तीन-पिट्ठी सार)
क्रॉस-रेफरेंस और संकेत
यात्रा में अन्य संदर्भ जो इस विचार से सहमत हैं: “तुम मोजूद नियमों को मानव के लिए नहीं, बल्कि मानव को नियमों के अनुरूप बनाते हो”—यह विचार यीशु के शब्दों में दोहराव पाता है (सूचनात्मक संदर्भ)। साथ ही, कुछ जगहों पर दया के साथ शास्त्र का समन्वय किया गया है जो इस प्रकार हैं: नियम और करुणा के बीच संतुलन की शिक्षा देता है (अन्य ग्रंथों के छोटे संदर्भों की नज़र से)।
व्यावहारिक निष्कर्ष
हमारा जीवन भी ऐसे निर्णयों में फँसता है जहाँ नियम और करुणा के बीच चुनाव करना पड़ता है। कठिन परिस्थितियों में Jesus के उदाहरण से सीख मिलती है कि मानवीय आवश्यकता के समय दया प्राथमिक होनी चाहिए, और नियमों को भी मानवीय संदर्भ में समझना चाहिए ताकि परमेश्वर के हृदय की इच्छा पूरी हो।
महत्वपूर्ण उद्धरण (public-domain से संकेत)
नोट: नीचे केवल सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों के संकेत हैं और यदि उपयुक्त मिले, तो संक्षेप में उद्धृत हैं:
Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सामान्य विचारों से गहराई मिलती है कि शब्त के दिन करुणा परमेश्वर के नियम के भीतर ही आती है और मानवता के लिए उद्धार का मार्ग है।
अनुपयुक्त शब्दावली के बिना, इस पंक्ति का सार यह है कि करुणा नियम से ऊपर नहीं है, बल्कि उसी के अनुरूप है।