Old Testament
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मत्ती 12:45 पर टिप्पणी — संदर्भ में बुझना
इस पद में यीशु ने एक नए उदाहरण के रूप में उस स्थिति की चेतावनी दी है जब एक व्यक्ति अपने अधर्म से लौटकर अच्छा नहीं बनता, बल्कि आत्म-विश्वास और दुष्टताओं से भर जाता है। यह संदर्भ तब आता है जब उस समय के धार्मिक नेताओं ने उसकी शक्ति को अस्वीकार कर कहा कि वह शातिर आत्माओं के साथ शत्रुता का परिणाम है। परन्तु वास्तविक पाठ यह है कि आत्मा-परेशान व्यक्ति के भीतर अराजकता का एक नया क्रम स्थापित हो सकता है यदि वह पुनः पतन के रास्ते पर चला।
मूल संदेश का केंद्रीय अर्थ
यही है कि एक व्यक्ति जो पाप-आत्म-स्वार्थ के दबाव से मुक्त नहीं होता, वह पुनः उसी स्थिति में आ सकता है, पर diesmal और भी गहराई से प्रभावित होकर। यदि वह बुरे प्रेरणाओं से भरे संसार में लौट आता है और परमेश्वर के शासन को ठेस पहुँचाने की कोशिश करता है, तो फिर से दुष्ट आत्माओं का एक दुष्कर क्रम उसके भीतर आ सकता है। यह एक चेतावनी है कि दोष-नुकसान से बचना आवश्यक है और परमेश्वर के साथ सत्यनिष्ठा बनाए रखना अति आवश्यक है।
मुख्य विषय
अनुशंसित क्रॉस-रेफरेंसे
1) मत्ती 12:43-45 में पूर्ववर्त्तित आत्मा-स्थिति का क्रम और उसके पुनरावर्तन की चेतावनी। यह दिखाता है कि परिवर्तन अगर स्थिर न हो तो शैतानी प्रभाव बढ़ सकता है। संकेत: सतह से अधिक गहराई पर इच्छा-परिवर्तन का महत्व।
2) 2 कुरिन्थियों 4:4-6 — दीपक की तस्वीर से यह स्पष्ट होता है कि अंधकार पर प्रभु की रोशनी ही वास्तविक परिवर्तन ला सकती है।
3) याकूब 4:7 — आत्म-विश्वास से ऊपर, परमेश्वर को स्थान देना कितना आवश्यक है ताकि अराजकता संतुलित हो सके।
व्यावहारिक विचार
हमारा आचरण यह बताता है कि एक बार पाप के चुंबन में पड़ना कितना सरल है, परंतु ईश्वरीय कृपा से लौटना भी संभव है। प्रतिदिन प्रभु को अपनाने, पवित्र अभ्यास—प्रार्थना, पवित्रशास्त्र अध्ययन, और भाई-बंधुओं के साथAccountability—इन से यह सुनिश्चित होता है कि हमारे भीतर नया क्रम बना रहे। अगर कोई व्यक्ति हाल ही में पाप की ओर बह गया है, उसे तुरंत माफ़ी माँगना, परिवर्तन के लिए प्रकृति को नई दिशा देना और सहायता माँगना चाहिए।
संक्षिप्त समापन
यह verse एक सावधान करने वाला संदेश है कि भीतर के क्षेत्र में जो असंतुलन पैदा होता है, वह जीवन के अन्य क्षेत्रों को प्रभावित कर सकता है। परमेश्वर के साथ स्थिर संबंध और भीतर की निरंतर परिवर्तन-यात्रा ही हमें दुष्ट शक्तियों के प्रभाव से बचाती है और एक समर्पित जीवन देती है।
नोट: इस टिप्पणी में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सीधे संकलित उद्धरण उपलब्ध नहीं हैं; यदि आवश्यक हों तो उनके सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणी-स्रोतों से छोटे विचारों को समाहित किया गया है।