मत्ती 12:26 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और यदि शैतान ही शैतान को निकाले, तो वह अपना ही विरोधी हो गया है; फिर उसका राज्य कैसे बना रहेगा?

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मत्ती 12:26 पद-दर-पद बाइबल टीका

मत्ती 12:26 परिप्रेक्ष्य में

यह वाक्य उस क्षण से जुड़ा है जब यीशु ने शास्त्रियों के आरोप-प्रश्नों के बीच शैतान की सत्ता के बारे में अपनी पुष्टि दी। शास्त्री पूछते थे कि यदि दुष्टात्मा एक-दूसरे को निकाले, तो क्या यह खड़ा होगा? यीशु दिखाते हैं कि ऐसी स्थिति में शैतान आपस में विरोधी हो उठेगा और उसका राज कैसे बना रहेगा। यह पाठ निष्कर्षतः ईमानदार आस्था की कसौटी है कि परमेश्वर का राज्य कैसे कार्य करता है, और दुष्ट力量 के साथ तुलना के द्वारा उद्धारकर्ता की दिव्यता स्पष्ट होती है।

परमेश्वर की सत्ता और सच्चे ईमान

इस वाक्य से दो प्रमुख विचार उभरते हैं: पहिले, शैतान का परिवार और उसके सत्ता-तंत्र का एकता में दृढ़ता से टिकना मना है; द्वितीय, अगर वही आशीर्वादी लोकों पर नियंत्रण बनाए, तो ईश्वर के काम का सत्यापन नहीं होता। यीशु का तर्क यह है कि बुराई अंदर-बाहर में विभाजित नहीं कर सकती; अगर वही अपनी ही सत्ता से एक दुष्टात्मा को निकाल दे, तो उसका राज कमज़ोर पड़ जाएगा। यह दर्शक है कि ईश्वर का दख़ल अधिक शक्तिशाली है और उसके राज्य का शासन बुराई पर विजय पाता है।

महत्त्वपूर्ण शब्द और चित्र

  • — यहां परमेश्वर के राज्य का तात्पर्य है, वह वास्तविक सत्ता और प्रभुता जो उद्धार और मानवीय जीवन में परिवर्तन लाती है।
  • — दुष्टात्मा का कुचक्र है जो मृत्यु और धोखे से हमें बाँधता है; परन्तु प्रभु के कार्य से उसका प्रभाव क्षीण होता है।

अन्य संदर्भ और संयोगी विचार

गुणों के संगत विचार: प्रश्न का उत्तर परिमार्जित रूप से मत्ती 12:28 में मिलता है, जहां यीशु कहता है कि “मैं देवताओं के राज्य से निकाले जाऊँगा”। लुका 11:18-20 भी एक समान तर्क देता है कि अगर ईश्वर की आहुती से शैतान को निकाला जाएगा, तो यह स्पष्ट है कि ईश्वर का राज्य है। साथ ही मत्ती 6:9-13 (पिता हमारे) बताता है कि ईश्वर किस प्रकार प्रेरित करता है कि उद्धार का राज आता रहे।

व्यावहारिक अनुप्रयोग

  • बुराई के विरुद्ध लड़ाई में विश्वास का आधार: यह पाठ हमें आश्वस्त करता है कि परमेश्वर का कार्य शैतान की योजनाओं से अधिक शक्तिशाली है।
  • आत्म-परिक्षण: क्या हम अपने जीवन में ईश्वर की सम्मिलित सत्ता को मानते हैं, या हम शत्रुत्व के आगे झुक जाते हैं?
  • समुदायिक चेतना: यह सीख हमें धर्मगुरुओं और पवित्र कार्यकर्ताओं के लिए एक नैतिक मानक देती है—खुद के निजी प्रयासों में भी ईश्वर की निर्णायक भूमिका को स्वीकारना।

संक्षेप निष्कर्ष

येशनुसार, यदि शैतान ही शैतान को न निकाल सके, तो उसका राज्य अस्थिर होगा। यह उद्धार-कार्य के लिए स्पष्ट प्रमाण है कि परमेश्वर का राज्य शुद्ध और स्थिर है, और यीशु वही शक्ति है जिसके द्वारा उद्धार संभव है।

कृपया ध्यान दें: संदर्भ-ग्रा

संदर्भों के लिए नीचे दिए गए त्वरित संबंध देखें: मत्ती 12:28; लूका 11:18-20; मत्ती 6:9-13।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

मत्ती 12:26 समानांतर पद और संबंधित वचन

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