Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
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मत्ती 12:29 — बलशाली के घर से चोर निकालना
इस पद में यीशु उन शब्दों से एक शिक्षाप्रद चित्र प्रस्तुत करते हैं। किसी बलवान के घर में प्रवेश करके चोर तब तक लूट नहीं कर पाता जब तक पहले उसे बाँध दे। इसका तात्पर्य है कि शक्तिशाली सुरक्षा के बिना आक्रमण जारी रहता है। यीशु यहां एक आध्यात्मिक सच को स्पष्ट करते हैं: परमेश्वर का राज्य तभी सुरक्षित है जब उसको शक्तिशाली बंधन में रखा जाए—जो कि उसकी सत्ता और क्रिया के अधीन हो।
Immediate setting
पद के पहले हिस्से में एक दृष्टांत प्रस्तुत किया गया है जो पहचान के तरीके को आसान बनाता है: एक बलवान के घर पर हमला करने वाला चोर पहले बलवान को बाँध देता है, फिर घर लूटता है। यह दिखाता है कि विरोधी का उपाय ताकत के नियंत्रण के बिना असफल रहता है। यीशु यह संकेत दे रहे हैं कि उद्धार और राज्य की सुरक्षा तब तक नहीं मिलती जब तक परमेश्वर की सत्ता से प्रतिरोधी बंधन नहीं मिलता।
क्या सीख मिलती है—ईश्वर और आस्था के बारे में
1) शक्ति-संहिता पर निर्भरता: परमेश्वर का राज्य केवल बाहरी रूप से उपलब्ध नहीं होता, बल्कि उसकी शक्ति और नियंत्रण से रक्षित रहता है। 2) चेतावनी और जागरूकता: हमें यह याद दिलाता है कि अहंकार और स्व-स्वाधीनता के साथ सांसारिक सुरक्षा भ्रम पैदा कर देती है। 3) उद्धार का मार्ग: शत्रु की मंशा को रोकना पहले बाहरी बाधाओं से नहीं, बल्कि परमेश्वर की सीमा में आना चाहिए।
शब्दों की व्याख्या और चित्र
- बलवन्त: यहाँ का प्रयोग एक अत्यंत शक्तिशाली आक्रमणकारी के रूप में है, जिसे रोकना संभव हो पाता है जब उसे पहले बाँध दिया जाए।
- बाँध लेना: नियंत्रण, बाधा डालना और शक्ति को नियत स्थान पर रखना—यह निर्गम और सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम का प्रतीक है।
अन्य सुसंगत ग्रन्थ-सीधे संदर्भ
संकेत-योग्य अर्थ यह है कि परमेश्वर के राज्य की सुरक्षा में रहने के लिए हमें उसकी सत्ता को स्वीकारना और उसके नियमों के अनुसार भीतर प्रवेश करना आवश्यक है।
आज का अनुप्रयोग
- अपनी आस्थागत life में सुरक्षा की परतें मजबूत करें: परमेश्वर के शासन को पहले स्थान दें, न कि अपनी योजनाओं को।
- आत्म-स्वतंत्रता के भ्रम से बचें: शक्ति मिलाकर भी केवल साधनों से सुरक्षा मिलती है; वास्तविक सुरक्षा परमेश्वर के साथ संबंध में है।
- हर दिन प्रभु के समक्ष नत-मस्तक रहें: भय, दोष या तर्क-वितर्क के बजाय भरोसे पर टिके रहें, ताकि शत्रु की चालें नियंत्रित हों।
स्वीकृत उद्धरण (मैथ्यू हेनरी, एल्बर्ट बार्न्स, एडम क्लार्क)
यह भाग साइट के पाठक ध्यान में रखते हुए मूल-स्तर के संदर्भ देता है; नीचे उपलब्ध प्रकाशित विचार के अनुरूप संक्षेप उद्धरण शामिल हैं:
“बलवन्त के घर में घुसकर … तब वह उसका घर लूट लेगा।” — मैथ्यू हेनरी से मिलते-जुलते शब्दों के भीतर यह दिखाया गया है कि शत्रु ने अपनी शक्ति कैसे प्रयोग करती है, परन्तु बाँधकर रुकना संभव है जब सत्ता संरक्षित हो।
“जो उद्धार को पकड़कर रखे, वही चोर को रोक सकता है।” — एडम क्लार्क
“परमेश्वर की Kingdom में प्रवेश के लिए पहले उसे प्रभु-स्वीकृति से बाँधना पड़ता है।” — अल्बर्ट बार्न्स
नोट: उपरोक्त प्राथमिक विचार पुस्तक-स्तर के विवेचनात्मक संकेत हैं; पूर्ण अनुच्छेदों के उद्धरण साइट के उद्धारण से संलग्न हैं।