Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यशायाह 1 यशायाह 2 यशायाह 3 यशायाह 4 यशायाह 5 यशायाह 6 यशायाह 7 यशायाह 8 यशायाह 9 यशायाह 10 यशायाह 11 यशायाह 12 यशायाह 13 यशायाह 14 यशायाह 15 यशायाह 16 यशायाह 17 यशायाह 18 यशायाह 19 यशायाह 20 यशायाह 21 यशायाह 22 यशायाह 23 यशायाह 24 यशायाह 25 यशायाह 26 यशायाह 27 यशायाह 28 यशायाह 29 यशायाह 30 यशायाह 31 यशायाह 32 यशायाह 33 यशायाह 34 यशायाह 35 यशायाह 36 यशायाह 37 यशायाह 38 यशायाह 39 यशायाह 40 यशायाह 41 यशायाह 42 यशायाह 43 यशायाह 44 यशायाह 45 यशायाह 46 यशायाह 47 यशायाह 48 यशायाह 49 यशायाह 50 यशायाह 51 यशायाह 52 यशायाह 53 यशायाह 54 यशायाह 55 यशायाह 56 यशायाह 57 यशायाह 58 यशायाह 59 यशायाह 60 यशायाह 61 यशायाह 62 यशायाह 63 यशायाह 64 यशायाह 65 यशायाह 66



यशायाह 36:14 — तत्कालीन संदर्भ और गहराई
यह पद यशायाह के समय की संधि-यात्रा और असुर के दबदबे के बीच राजा हिजाकिय्याह के शरणार्थी समय की वास्तविकता को उजागर करता है। आसन्न आक्रमण के साथ दमघोंटू संदेश पहाड़ों पर उड़ा रहा है कि यहोवा के बजाय मानव-यंत्रणा पर ही टिकना कितना खतरनाक है। संदेशक कहते हैं: “तुम्हें धोखा न दे… वह तुम्हें बचा न सकेगा।”
ईश्वर और विश्वास पर यह पाठ क्या दिखाता है
यह पाठ दिखाता है कि किसी भी समय विश्वास का केंद्र भय नहीं, बल्कि परमेश्वर की सत्ता और वचन की अनुग्रह है। दुष्टों के पत्र या धमकी के सामने भी विश्वासी को अपने प्रभु पर स्थिर रहने की अर्जित गांधी मिलती है। यह संदेश देता है कि वैसी रक्षा जो मनुष्य की चालाकी या सैन्य शक्तियों पर निर्भर हो, अंततः विफल हो सकती है; परमेश्वर की रक्षा और वचनों में ही वास्तविक सुरक्षितता है।
प्रमुख शब्दों और छवियों की स्पष्ट व्याख्या
संबंधित उद्धरण और संदर्भ
1) इब्रानी लेखन में विश्वास की रक्षा के लिए परमेश्वर के वचन पर टिके रहने की प्रेरणा मिलती है।
2) अय्यूब या दाऊद के समय में भी भय के संकट में परमेश्वर के साथ स्थिर रहने का आह्वान बार-बार आता है।
3) यशायाह के पहले भागों में भी उसी प्रकार प्रभु की रक्षा और असुरों के निष्कर्ष का सत्यनिष्ठ प्रमाण आता है कि परमेश्वर ही एकमात्र सुरक्षा है।
पवित्र शास्त्र से प्रकाश– क्रॉस-रेफरेंस
कृपया नीचे के संदर्भों को देखें, जहां भरोसा और भय के बीच का चयन प्रस्तुत है—ध्यान दें कि यहां पूर्ण शास्त्रीय पदों का पाठ नहीं दिया गया है, बल्कि उनके विचारों की सहायता से एकीकृत समझ बनती है:
आज के जीवन में अनुप्रयोग
आज भी हम जब बाहरी दबाव, आलोचना या असुरक्षा का सामना करें, तो भय के स्थान पर परमेश्वर के वचन पर टिके रहने का चुनाव करें। जैसे यह संदर्भ हमें सिखाता है कि मनुष्य के समर्थ नहीं, परमप्रभु की रक्षा ही वास्तविक सुरक्षा है। कदम-कदम पर प्रभु की प्रेरणा को याद करें, prayed-समय और नीयत को ईश्वर के उद्देश्य के अनुरूप संरेखित करें।
संक्षिप्त निष्कर्ष
यह पद यह स्मरण कराता है कि धोखे की धमकी के बावजूद विश्वासी को परमेश्वर के प्रतिज्ञाबद्ध संरक्षण पर भरोसा बनाए रखना चाहिए। शत्रु कितनी भी ताकत दिखाए, वह परमेश्वर के सामने टिक नहीं सकता।
महत्वपूर्ण उद्धरणों के लिए: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke आदि के सार्वजनिक-डायम स्रोतों से आवश्यकता अनुसार संक्षेपित विचार समाहित हैं; यदि उपलब्ध हों तो उनके विशिष्ट वाक्यांश यहाँ उद्धृत किए गए हैं।