Old Testament
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यशायाह 1 यशायाह 2 यशायाह 3 यशायाह 4 यशायाह 5 यशायाह 6 यशायाह 7 यशायाह 8 यशायाह 9 यशायाह 10 यशायाह 11 यशायाह 12 यशायाह 13 यशायाह 14 यशायाह 15 यशायाह 16 यशायाह 17 यशायाह 18 यशायाह 19 यशायाह 20 यशायाह 21 यशायाह 22 यशायाह 23 यशायाह 24 यशायाह 25 यशायाह 26 यशायाह 27 यशायाह 28 यशायाह 29 यशायाह 30 यशायाह 31 यशायाह 32 यशायाह 33 यशायाह 34 यशायाह 35 यशायाह 36 यशायाह 37 यशायाह 38 यशायाह 39 यशायाह 40 यशायाह 41 यशायाह 42 यशायाह 43 यशायाह 44 यशायाह 45 यशायाह 46 यशायाह 47 यशायाह 48 यशायाह 49 यशायाह 50 यशायाह 51 यशायाह 52 यशायाह 53 यशायाह 54 यशायाह 55 यशायाह 56 यशायाह 57 यशायाह 58 यशायाह 59 यशायाह 60 यशायाह 61 यशायाह 62 यशायाह 63 यशायाह 64 यशायाह 65 यशायाह 66



सार: यहोवा के भरोसे पर निर्भर न करना चाहिए—यशायाह 36:15
सीधे शब्दों में कहें तो शान के क्षणों में भी यहोवा के भरोसे की असली सुरक्षा हमें दिखाती है, न कि अश्शूर की सेनाओं के बदले हुए हालात। यहाँ कहा गया पाठ यह सूचित करता है कि अगर राजा हिजकिय्या यह कहकर भरोसे की घोषणा करें कि यह नगर परम सुरक्षित है, तो यह एक गलत मनोभाव है।
पार्श्वभूमि और स्थिति
यशायाह 36-37 के भाग में अश्शूर साम्राज्य की आक्रमण की बेला है। भगवान के नबियों के संदेशों के विपरीत, नगर के प्रमुख लोग सैनिक शक्ति पर भरोसा बनाने की प्रवृत्ति दिखाते हैं। यह वचन उसी संदर्भ में आता है जहाँ शूरसी के राजा के दूत सीधे यरूशलेम के बाहर जाकर कहता है कि नगर की सुरक्षा मनुष्य की चतुराई या निर्भरता पर नहीं, बल्कि यहोवा की योजना पर है।
व्याख्यात्मक अवलोकन
छोटे थीमैटिक बिंदु
अन्य पवित्र ग्रंथ से समान विचार
यशायाह 7:4— डर को कम करने के लिए यहोवा से सहायता की अपेक्षा रखें; यह कहना कि शत्रु हमारे विरुद्ध नहीं है, हृदय को क्षणिक कारणों से भटकाता है।
भजन 27:3— भीड़ के बीच भी एकात्मता और परमेश्वर के साथ सुरक्षा की अनुभूति।
यूहन्ना 14:1— प्रभु यीशु के अनुसार हमारे हृदय में स्थान नहीं तब तक जब तक हम परमेश्वर के साथ अपना भरोसा नहीं रखते।
पूर्व के टिप्पणीकारों के संजोए विचार (संक्षिप्त, उद्धरणों के भीतर)
Matthew Henry का निष्कर्ष यह है कि भरोसा केवल शब्दों में नहीं, परन्तु कर्मों के साथ होना चाहिए, ताकि हम यह न मान लें कि बाहरी सुरक्षा स्वतः है।
Albert Barnes ने कहा कि मानव शक्ति का भ्रम शीघ्र नाश होता है, और असली रक्षा परमेश्वर की आज्ञाओं में है।
Adam Clarke इस तथ्य को स्पष्ट करते हैं कि यह सूक्ति यह सिखाती है कि भय या दूतों की धमकियों के सामने भी विश्वास स्थिर रहना चाहिए, क्योंकि सुरक्षा परमेश्वर के हाथों में है।
संक्षिप्त किस प्रकार का निष्कर्ष लिया जाए
हमें याद रखना चाहिए कि यहोवा की विश्वसनीयता बाहरी सुरक्षा से ऊपर है। संकट के समय पहले अपने दिल को यहोवा के साथ स्थापित करें; धन-दौलत या सैन्य शक्ति पर निर्भरता तात्कालिक सुरक्षा दे सकती है, पर असली सुरक्षा परमेश्वर की योजनाओं और वચनों में है।
कथात्मक क्रॉस-रेफरेंसेस
1) बाइबल के अन्य भागों में भी ऐसे समय मिलते हैं जब लोग संकट के समय earthly सुरक्षा पर निर्भर होते हैं और परमेश्वर पर नहीं. यह दिखाता है कि भरोसा कैसे गलत दिशा ले सकता है।
2) यहोवा के वचनों के अनुसार भय को कम और विश्वास को बढ़ाने पर जोर देता है, ताकि धार्मिक जीवन संतुलित रहे।
प्रयोगात्मक निष्कर्ष: संकट के समय अपनी दृष्टि को ऊँचा रखें, परमेश्वर के निशान और उपदेशों पर टिके रहें और दिखने वाले सैन्य-शक्तियों से प्रेरणा पाने के बजाय उनके पीछे छिपे परमेश्वर के उद्देश्य को समझने का प्रयास करें।