यशायाह 36:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

मेरा कहना है कि क्या मुँह से बातें बनाना ही युद्ध के लिये पराक्रम और युक्ति है? तू किस पर भरोसा रखता है कि तूने मुझसे बलवा किया है?

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यशायाह 36:5 पद-दर-पद बाइबल टीका

यशायाह 36:5 पर उद्धृत महत्व

यह वचन हमें यह सिखाते हैं कि युद्ध-यात्रा और शक्ति-कौशल केवल भौतिक उपायों पर निर्भर नहीं होते। खुली चुनौती के समय जब राजा संसारिक शक्तियों पर भरोसा करने का आग्रह करता है, तब परमेश्वर की ओर से दिखने वाला एक दुष्प्रभाव-भरा सम्वाद सामने आता है। इस वचन से प्रेरणा मिलती है कि भरोसा किस पर हो, यह निर्णायक है: निर्भरता किसके ऊपर है और कौन परेशानी के समय वास्तविक सुरक्षा देता है।

स्थिति का संदर्भ और मूल संदेश

यशायाह 36 अध्याय में बाइट-युग के संकट के समय यह उद्घोषणा सामने आती है कि राजा और उसकी सैन्य योजना बाहरी शक्ति पर निर्भर है। आश्वासन यह है कि मुँह से बातें बनाकर युद्ध जीतना, या बलवा की योजना ही सब कुछ नहीं है। प्रभु पूछते हैं: तुम किन पर भरोसा करते हो? यह सवाल हमें यह दिखाता है कि सबसे बड़ी सुरक्षा परमेश्वर की कर्म-योजना पर होती है, न कि मानव-यत्नों पर।

मुख्य विचार

  • ईश्वर की सुरक्षा बनाम मानव-योजना: यह वचन मानव-प्रयत्न की सीमाओं को उजागर करता है और यह स्पष्ट करता है कि परमेश्वर ही वास्तविक सहायताकर्ता है।
  • विश्वास बनाम भय: संदिग्ध स्थितियों में भी परमेश्वर पर भरोसा रखने से मानसिक और आध्यात्मिक शांति मिलती है।
  • कथा से सीख: राजा ने दिखाया कैसे पृथ्वी-आधारित शक्तियों पर अत्यावश्यक निर्भरता परिणामस्वरूप भय, आत्म-गर्विता या निर्लभता पैदा कर देती है; परन्तु परमेश्वर की आवाज़ से मार्गदर्शन मिलता है।

परिशुद्ध ब्रह्म-वाणी से जुड़े बाइबल-जाँच

कई दशाओं में परमेश्वर के चेलों को मानव-योजना के विरुद्ध विश्वास की परीक्षा होती है। नीचे दिए गए क्रॉस-रेफरेंसेस इस दुविधा के साथ सहारा बनते हैं:

  • यशायाह 7:9 — यदि आपका विश्वास टिकेगा, तो आप स्थिर रहेंगे; किन्तु यदि आप नरम-दिल होकर भयभीत होंगे, तो आप जो कुछ भी संभव नहीं पाएंगे वही बन जाएगा। यह एक निवारक स्मरण दिलाता है कि हृदय की दृढ़ता परमेश्वर पर टिकी होनी चाहिए।
  • यिर्मयाह 17:5 — जिस पर मनुष्य भरोसा करता है वह पृथ्वी-पर है; जो परमेश्वर पर भरोसा करता है, वह हृदय से आस्थावान रहता है। यह तुलनात्मक चेतावनी है कि मनुष्य-पर भरोसा कितना परिणाम-रहित हो सकता है।
  • भजन 20:7 — कुछ लोग बाण-शक्ति पर भरोसा करते हैं, परन्तु परमेश्वर के नाम पर आराधन करने वालों का समर्थन सदा स्थिर रहता है। यह भिन्न-युक्त संकेत देता है कि किस प्रकार विश्वास की दिशा बनती है।

एच्छिक टिप्पणी: समान-विषयक पंक्तियाँ

Matthew Henry, Barnes, और Clarke के सार्वजनिक-डomain टिप्पणियाँ से कुछ संबद्ध विचार इस प्रकार मिलते हैं:

Henry का तात्पर्य है कि मानव कौशल से अधिक परमेश्वर की इच्छा को मानना चाहिए, अन्यथा युद्ध और संताप केवल बढ़ेंगे। Barnes इस बात पर प्रकाश डालते हैं कि असल शक्ति परमेश्वर की मान्यता में है—मनुष्य के उपाय केवल साधनों तक सीमित रहते हैं, परिणाम परमेश्वर के निर्णय पर निर्भर हैं। Clarke इसे यह समझाते हैं कि यह पंक्ति श्रद्धा की कसौटी बनती है—जो लोग केवल अपने मुँह-फूँक-फूँक कर योजना बनाते हैं, वे परमेश्वर की अधिकारी सत्ता से वंचित रह जाते हैं।

नोट: इन टिप्पणीकारों के छोटे उद्धरण पाठ में उपलब्ध नहीं हैं, पर उनके सामान्य निष्कर्ष इस दावे को पुष्ट करते हैं कि भरोसा परमेश्वर पर हो, न कि मानव-योजना पर।

जीवंत समापन: आध्यात्मिक-व्यावहारिक प्रार्थना

हे परमेश्वर, जब भी हमारी दृष्टि संकटों के समय सीमा-रेखा पर अटक जाए, तू हमें अपनी सुरक्षा-छाया में रहने का अनुभव देगा। मुँह से निकलती बहसों और तात्कालिक उपायों से ऊपर उठकर हम यह स्मरण रखें कि केवल तुझ पर भरोसा ही स्थिरता देता है। हमें ज्ञान दे कि हम अपने हाथों के प्रयासों से पहले तेरे निर्देश को पूछें, और जब तू कहे, तब ही आगे बढ़ें। हमारी सांसों में तेरा प्रेरक स्वर बना रहे, ताकि हम भय के बावजूद भी विश्वास की राह चुनें।Amen.

क्रॉस-रेफरेंसेस के साथ यह विचार इस बात को मजबूत करता है कि परमेश्वर की आज्ञाओं पर टिके रहने से जीवन में स्थिरता और सुरक्षा मिलती है, भले ही मानव-यु्क्तियों की प्रतिध्वनि कितनी भी तेज क्यों न हो।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यशायाह 36:5 समानांतर पद और संबंधित वचन

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इसलिए यहोवा उसके संग रहा; और जहाँ कहीं वह जाता था, वहाँ उसका काम सफल होता था। और उसने अश्शूर के राजा से बलवा करके, उसकी अधीनता छोड़ दी।

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उसके दिनों में बाबेल के राजा नबूकदनेस्सर* ने चढ़ाई की और यहोयाकीम तीन वर्ष तक उसके अधीन रहा; तब उसने फिरकर उससे विद्रोह किया।

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यह सुनकर होरोनी सम्बल्लत और तोबियाह नामक कर्मचारी जो अम्मोनी था, और गेशेम नामक एक अरबी, हमें उपहास में उड़ाने लगे; और हमें तुच्छ जानकर कहने लगे, “यह तुम क्या काम करते हो। क्या तुम राजा के विरुद्ध बलवा करोगे?”

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