Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यशायाह 1 यशायाह 2 यशायाह 3 यशायाह 4 यशायाह 5 यशायाह 6 यशायाह 7 यशायाह 8 यशायाह 9 यशायाह 10 यशायाह 11 यशायाह 12 यशायाह 13 यशायाह 14 यशायाह 15 यशायाह 16 यशायाह 17 यशायाह 18 यशायाह 19 यशायाह 20 यशायाह 21 यशायाह 22 यशायाह 23 यशायाह 24 यशायाह 25 यशायाह 26 यशायाह 27 यशायाह 28 यशायाह 29 यशायाह 30 यशायाह 31 यशायाह 32 यशायाह 33 यशायाह 34 यशायाह 35 यशायाह 36 यशायाह 37 यशायाह 38 यशायाह 39 यशायाह 40 यशायाह 41 यशायाह 42 यशायाह 43 यशायाह 44 यशायाह 45 यशायाह 46 यशायाह 47 यशायाह 48 यशायाह 49 यशायाह 50 यशायाह 51 यशायाह 52 यशायाह 53 यशायाह 54 यशायाह 55 यशायाह 56 यशायाह 57 यशायाह 58 यशायाह 59 यशायाह 60 यशायाह 61 यशायाह 62 यशायाह 63 यशायाह 64 यशायाह 65 यशायाह 66



यशायाह 60:9 — संकल्पित आशा के पथ
इस आयत का सत्वभाव है: यहोवा की चमत्कारी योजना से धीरे-धीरे विदेशीाटन के जहाज, द्वीप तक पहुँचें और तेरे पुत्रों को सम्मानजनक जलसे से जिलाने के लिए लाएं। यहुशिया-संकल्पित उद्धार की दिशा में एक स्पष्ट संकेत है कि परमेश्वर का उद्धार प्रजातियों के बीच फैला है, और तेरे लिए यह शक्ति पोशाक बनकर प्रकट होती है।
प्रसंग-परिप्रेक्ष्य
यशायाह की पुस्तक युग-युग से चल रहे उद्धार के संदेश देती है—युद्ध और अंधकार के बीच, परमेश्वर अपने दास यरूशालेम के लिए भीतरी और बाहरी धरोहर बनाते हैं। 60 अध्याय का केंद्र ध्येय यह है कि परमेश्वर का तेज चमक उठेगा और गैर-यहूदी भी उसकी रोशनी से आकर उद्धार पाएंगे। यहाँ “निश्चय द्वीप” से सहज आशय है कि पृथ्वी के किनारों तक उसकी महिमा फैल जाएगी, और वन-वन-देश से लोग आकर उसकी महिमा और पवित्रता के निमित्त चढ़ावेंगे।
Interpretive observations
संकेतित मुख्य बिंदु
अनुष्ठानिक क्रॉस-रेफरेंस
1) इस्राएल-जाति की पुनरुत्थान की आशा: यह आयत वही सोच पर प्रकाश डालती है जिसमें “तेरे पुत्र” और “तुझे शोभायमान किया गया है” का क्रम चलता है—यशायाह के अन्य हिस्सों में भी उद्धार के विश्वव्यापी स्वर का समावेश है।
2) विश्व-भक्ति की प्रतिज्ञा: पुराने नियम के बाहर के लोग भी पवित्रकार्यों में डाले जाते हैं—जैसे अन्य प्रेषणों में बतला गया है कि जातियों के द्वारा यह उद्धार प्राप्त होगा।
3) परमेश्वर की महिमा का प्रचार: द्वीप तक पहुँचते हुए यह स्पष्ट होता है कि प्रभु की महिमा सीमाओं से परे फैलती है।
संक्षेपित विश्व-उपयोगी निष्कर्ष
यह आयत हमें याद दिलाती है कि ईश्वर अपने आत्मिक राज्य के लिए विश्व-व्यापी आह्वान कर रहे हैं। गैर-यहूदी समुदायों के लिए भी उद्धार का दरवाजा खुला है, और उनके आना से तेरे समुदाय की शोभा बढ़ेगी। परमेश्वर की महिमा और पवित्रता का उद्घाटन तब संभव होता है जब हम उसकी नाव को पूरी तरह तिनके कर दें, और उसकी योजना के अनुसार अपनी धार्मिक-जातीय सीमाओं को छोड़ दें।
पूर्वतैयारी और व्यवहारगत takeaway
इस टिप्पणी में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के स्पष्ट उद्धरण उपलब्ध नहीं हैं; यदि उपलब्ध हों, तो वे पाठ के प्रवाह के अनुरूप संकीर्ण जगहों पर सम्मिलित किए जाते, पर यहाँ उनका आंशिक रूप अवश्यक-तत्व रूप में समाहित किया गया है ताकि मूल संदेश स्पष्ट रहे।