उत्पत्ति 31:16 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

इसलिए परमेश्‍वर ने हमारे पिता का जितना धन ले लिया है, वह हमारा, और हमारे बच्चों का है; अब जो कुछ परमेश्‍वर ने तुझ से कहा है, वही कर।”

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उत्पत्ति 31:16 पद-दर-पद बाइबल टीका

उत्पत्ति 31:16 पर तात्कालिक व्याख्या

प्रधान interpretive point: जो कठिन हालात बनते हैं, वहाँ परमेश्वर की सर्वोच्च समर्थता और हमारी आस्था की परीक्षा भी उभरती है। यह वचन बताता है कि लावान और उसकी पत्नी-जन को बेटे-बेटियों सहित जो कुछ मिला है, वह उनके परमेश्वर के नियोजन के अधीन है।_astute insight_: याकूब का उत्तरदायित्व यह नहीं कि वह अपने मालिक से किसी तरह के धन-सम्पत्ति के बहाने से संचय करे, बल्कि जो परमेश्वर ने दिया है, वही उन्हें मान्यता और संरक्षा देते हुए आगे बढ़ना है। यह भय या दबाव के समय में भी भरोसे की जीर्ण-हृदय-समझ को दर्शाता है: जीवन के स्रोत सेतु परमेश्वर है, न क्षणिक अवसर और न मनुष्यों की इच्छा।

कथात्मक-संदर्भ (Literary Context)

इस पद पर याकूब और लैबन के रिश्ते में तनाव चरित है, जब याकूब के द्वारा परिवार-धरोहर की सुरक्षा और स्वतंत्रता की खोज चलती है। लैबन के घर में वर्षों तक काम करने के बाद, याकूब ने स्पष्ट किया कि जो धन-सम्पदा उनके पिता के परिवार ने पाया है, वह उनके ही कुल का है—यह एक कानूनी-आर्थिक और पारिवारिक अधिकार की घोषणा है। यह बताता है कि याकूब के लिए परमेश्वर का चयनित मार्ग न्याय और सत्य के आधार पर है, न कि समाज की दायित्व-बाधाओं से।

तत्वमीय significance

- परमेश्वर की कृपा का मान्य स्वरूप: दान जो पिता के धन के रूप में मिला, वह यहाँ परिवार का है, न कि स्वार्थ या छल से। यह संकेत देता है कि परमेश्वर अपने बच्चों के लिए सुरक्षा और राहत की व्यवस्था करता है।

- विश्वास-आचरण की ठहराव: याकूब ने परिवार के हितों को प्राथमिकता देकर पुष्टि दी कि उनका बनना-जानना परमेश्वर की योजना के अनुरूप है। यह धार्मिक-आत्म-समर्पण का उदाहरण है।

Cross-references (Cross-scriptural connections)

  • उत्पत्ति 28:20–21 — याकूब का संकल्प और परमेश्वर की वचन-प्रतिज्ञा के प्रति समर्पण; यह दिखाता है कि धन-संपदा भी परमेश्वर के वादे के अनुरूप सही उपयोग में होनी चाहिए।
  • उत्पत्ति 33:11 — वेनिष्ठ प्रेम और आशीषों का वितरण; पारिवारिक सम्पत्ति का न्यायसंगत विभाजन और भाइयों के बीच रिश्तों की स्थिरता को बल मिलता है।
  • निर्गमन 22:25 — गरीबों के साथ व्यवहार और धन-सम्पत्ति का उचित उपयोग; यह यहाँ के विचार को सामाजिक-न्याय के साथ जोड़ता है।

विमर्श के प्रश्न

  • क्या धन-दौलत के मालिक बनना नहीं, बल्कि परमेश्वर की कृपा के स्रोत को पहचानना अधिक मूल्यवान है? आप अपने जीवन में इसे कैसे व्यवस्थित करते हैं?
  • परिवार के हितों के सामने व्यक्तिगत लाभ कैसे संतुलित होते हैं? क्या आप अपने निर्णयों में परिवार-हित को प्राथमिकता देते हैं?
  • संकट के समय में आप परमेश्वर की योजना पर भरोसा कैसे बनाए रखते हैं?

संक्षिप्त निष्कर्ष

उत्पत्ति 31:16 में याकूब ने स्पष्ट कर दिखाया कि परिवार के धन-संपदा के अधिकार परमेश्वर के निर्देश के अधीन हैं और उनका उद्देश्य परिवार-कल्याण को सुनिश्चित करना है। यह धैर्य, ईमान, और परमेश्वर के नियोजन के प्रति पूर्ण विश्वास का संदेश देता है—कि हमारे भौतिक स्रोत भी परमेश्वर के मार्ग के अनुरूप विकसित होते हैं जब हम उसकी योजना में भरोसा रखते हैं।

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उत्पत्ति 31:16 समानांतर पद और संबंधित वचन

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अतः उसने उसी दिन सब धारीवाले और चितकबरे बकरों, और सब चित्तीवाली और चितकबरी बकरियों को, अर्थात् जिनमें कुछ उजलापन था, उनको और सब काली भेड़ों को भी अलग करके अपने पुत्रों के हाथ सौंप दिया।

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इस रीति से परमेश्‍वर ने तुम्हारे पिता के पशु लेकर मुझको दे दिए।

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हे राजकुमारी सुन, और कान लगाकर ध्यान दे; अपने लोगों और अपने पिता के घर को भूल जा;

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