उत्पत्ति 31:24 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

तब परमेश्‍वर ने रात के स्वप्न में अरामी लाबान के पास आकर कहा, “सावधान रह, तू याकूब से न तो भला कहना और न बुरा।”

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उत्पत्ति 31:24 पद-दर-पद बाइबल टीका

अर्थ का सीधे-साफ सार

उत्तरण: उत्पत्ति 31:24 में परमेश्वर ने रात के स्वप्न में अरामी लाबान से कहा कि याकूब के बारे में तू न तो भला कहें और न बुरा। इसका मतलब है कि परमेश्वर ने याकूब के लिए एक निर्णायक सतर्कता और सुरक्षा प्रदान की ताकि लाबान का भेदभावपूर्ण या दुष्ट व्यवहार उसे नुकसान न पहुंचाए।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

याकूब ने बहुदा संकटों से गुज़रा—अपने परिवारिक रिश्ते, अपनी संपत्ति, और अपने संबंधों में जटिलताओं का सामना करता रहा। इस समय लाबान के साथ उनका रिश्ता तनावपूर्ण था; दोनों पक्षों के पास संपत्ति, प्रेम और भरोसे के आँकड़े थे। परमेश्वर का यह रात्री-स्वप्न संकेत देता है कि वह याकूब के डर को समझता है और उसे सुरक्षा देता है, ताकिYाकूब की नैतिकता और सत्यनिष्ठा प्रभावित न हो।

interpretive observations (व्याख्यात्मक टिप्पणियाँ)

  • परमेश्वर के संवाद की विशेषता: यह शब्द “सावधान रह” एक चेतावनी है, न कि एक आदेशात्मक नियंत्रण। परमेश्वर चाह रहा है कि याकूब के मानवीय जोखिमों में वह नैतिकता बनाए रखे।
  • द्वंद्वपूर्ण वातावरण में मार्गदर्शन: स्वप्न के माध्यम से ईश्वर ने याकूब की सुरक्षा सुनिश्चित की और उसे बाहरी चालाकी से दूर रहने को कहा—यह संकेत है कि स्थिरता और आध्यात्मिक विवेक परिस्थितियों के दबाव से महत्वपूर्ण हैं।
  • सत्यनिष्ठा बनाम दबाव: याकूब को अपने आप को बचाने के तरीके चुनने हैं, पर परमेश्वर के निर्देश उसके ईमान और दया-संवेदना को बनाए रखने के लिए हैं।

संक्षिप्त थीम-सूची

  1. धार्मिक विवेक बनाम सामाजिक दबाव
  2. ईश्वर का संरक्षण सक्रिय रूप से सहारा देता है
  3. सत्य और सुरक्षा के बीच संतुलन

अनुबंधित cross-references (संयुक्त संदर्भ) और उनका संक्षिप्त प्रभाव

1) उत्पत्ति 28:12-15 — अब्राहमिक आशीष और ईश्वर की वचन-प्रेरणा याकूब के साथ बनी रहती है, यह संकेत देता है कि परमेश्वर हर परिस्थिति में उसकी रक्षा करते हैं।

2) उत्पत्ति 32:7-9 — याकूब को संकट का सामना करते समय परमेश्वर की सुरक्षा की याद आती है; विवेकपूर्ण गति और प्रार्थना उसके मार्गदर्शन के हिस्से हैं।

3) भजन 1:1-3 — धार्मिक विवेक से भरा जीवन, दुष्टों के साथ के बिना स्थिर और फलदार रहता है; यह विचार इस संदर्भ के नैतिक ध्येय को पुष्टि देता है कि विवेकपूर्ण दूरी ही सुरक्षा की कुंजी है।

व्यावहारिक Takeaway (संक्षेप-उपयोगी निष्कर्ष)

  • कठिन परिस्थितियों में भी ईश्वर के मार्गनिर्देशन पर भरोसा रखें और अनावश्यक जोखिम से बचें।
  • भरोसे और नैतिकता को बनाए रखना किसी भी परिस्थिति में अधिक महत्वपूर्ण है, भले ही दबाव बढ़े।

टिप्पणी का सार (1-2 पंक्तियाँ)

यह संदेश है कि परमेश्वर हमारे साथ तब भी है जब परिस्थितियाँ उलटे पड़ें, और वह हमें सच बोलने, दूसरों के साथ निष्पक्ष रहने, तथा दुष्ट चालों से दूर रहने की चेतावनी देता है ताकि हम अपने लक्ष्य—उसके सम्मान और आत्म-सम्मान को बनाये रखें—तक पहुँच सकें।

कैथोलिक-प्रकाशित अंश (उद्धृत संक्षेप): प्लेटफॉर्म पर Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke जैसा पूर्ण उद्धरण इस पंक्ति में उपलब्ध नहीं है, पर उनके सर series से निकलने वाले विचार यहाँ समाहित हैं—ध्यान रहे कि उनके शब्द सीधे उद्धृत नहीं हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

उत्पत्ति 31:24 समानांतर पद और संबंधित वचन

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रात को परमेश्‍वर ने स्वप्न में अबीमेलेक के पास आकर कहा, “सुन, जिस स्त्री को तूने रख लिया है, उसके कारण तू मर जाएगा, क्योंकि वह सुहागिन है।”

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तब लाबान और बतूएल ने उत्तर दिया, “यह बात यहोवा की ओर से हुई है; इसलिए हम लोग तुझ से न तो भला कह सकते हैं न बुरा।

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तुम लोगों की हानि करने की शक्ति मेरे हाथ में तो है; पर तुम्हारे पिता के परमेश्‍वर ने मुझसे बीती हुई रात में कहा, 'सावधान रह, याकूब से न तो भला कहना और न बुरा।'

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