Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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उत्पत्ति 31:7 का स्पष्ट अर्थ
यही वचन बताता है कि लेआं और राकेल के पिता लाबान ने याकूब के साथ छल-कपट किया। जबकि याकूब ने अपनी भागीदारी, मेहनत और सत्य के साथ ईश्वर पर भरोसा बनाए रखा, परमेश्वर ने उसे नुकसान पहुँचाने से रोक दिया। सरल शब्दों में: मानव चालाकी कितनी भी हो, परमेश्वर की देखरेख उसे सुरक्षित रखती है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
याकूब ने लैबन के साथ अपने रिश्ते में वर्षों तक कठिन सेवकाई दी। लैबन ने पहले उसे अपनी बेटी राकेल से विवाह के लिए प्रेम के बदले मोल-भाव किया और बाद में उसकी मजदूरी के दाम बार-बार बदले। इस पाठ में याकूब का संघर्ष, लैबन के स्वार्थ और ईश्वर की रक्षा एक साथ उभरती है। यह उद्धारक इतिहास का हिस्सा है जहाँ परमेश्वर अपने चयनित व्यक्ति के साथ विश्वासयोग्य रहता है, भले ही संसार की चालाकी कितनी भी गहराई तक जाए।
interpretive observations
थीमेटिक बुलेट
अन्य बाइबिल पाठों से क्रॉस-रेफरेंसेस
सम्बद्ध संकेत: - युवकों का संघर्ष और ईश्वर की देन (उत्पत्ति 28:15): परमेश्वर किस प्रकार मार्गदर्शक बना रहता है और सुरक्षा का आश्वासन देता है—याकूब को फिलहाल नहीं, बल्कि भविष्य में भी। - भरे हुए समय में ईश्वर की साक्षी-प्रतिज्ञा (उत्पत्ति 32:28): ईश्वर ने याकूब से उसका नया नाम और आशीर्वाद सुनिश्चित किया, जो इस पाठ के विश्वास-निर्माण को प्रबल करता है। - ईश्वर की न्याय और संरक्षण (उत्पत्ति 33:20): भाइयों के बीच शांति और ईश्वर की योजना का पूर्णत्व—यह भी यह दिखाता है कि परमेश्वर अपने चुने हुए के पक्ष में है।
संક્ષिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष
परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी अस्थिर क्यों न हों, ईश्वर पर भरोसा बनाए रखना और सत्य के साथ काम करना श्रेष्ठ मार्ग है। दुर्बल स्थिति में भी परमेश्वर हमारी रक्षा करता है और हमें अपने उद्देश्य की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है।
अतिरिक्त टिप्पणी और उद्धरण (एतिहासिक प्रवचन से)
यह पंक्ति स्पष्ट करती है कि दया और धर्मी रहना कितना आवश्यक है जब संसार के तन्तु श्रीशकित हो रहे हों। मैथ्यू हेनरी, ऐल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क जैसे सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकार इस प्रकार की घटनाओं को ईश्वर की चुनींदगी और जोखिम-भरे समय की सुरक्षा के तौर पर देखते हैं।
उद्धृत संक्षिप्त टिप्पणी (यदि उपलब्ध): - "परमेश्वर ने उसको मेरी हानि करने नहीं दिया"—Henry, Barnes, Clarke में से किसी एक के पूर्ण वाक्यों का पुनरुक्ति नहीं दी गई है, पर उनके विचार यह संकेत करते हैं कि ईश्वर की निगरानी एक सुरक्षा-चक्र है।