उत्पत्ति 31:18 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और जितने पशुओं को वह पद्दनराम में इकट्ठा करके धनाढ्य हो गया था, सबको कनान में अपने पिता इसहाक के पास जाने की मनसा से, साथ ले गया।

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उत्पत्ति 31:18 पद-दर-पद बाइबल टीका

उत्पत्ति 31:18 का संदर्भ और Bedeutung

इस पद में याकूब अपने सबित पुत्र-परिवार के साथ मक्का-यात्रा से भागकर पादरेह के पास कनान लौटता है, और वह अपनी संपत्ति—पशु, धन—सब कुछ लेकर गया। यह घटनाक्रम तब होता है जब याकूब के जीवन में उत्पन्न परिवर्तन और परमेश्वर की योजना के अनुरूप उसकी गति बनती है: एक नया ठिकाना, एक नई आस्थागत दिशा, और पूर्व के व्यावसायिक संबंधों से मुक्त-स्वतंत्र यात्रा।

मुख्य भावनात्मक अर्थ

यह verse दिखाती है कि याकूब अपने संयुक्त परिवार के साथ नई शुरुआत कर रहा है, जिसमें उसका उद्देश्य कनान लौटना और पिता इशाक की आशीष प्राप्त करना है। साथ ही, वह अपने अधिकार-धन को भी संरक्षित करके, भविष्य के लिए एक सुरक्षित मार्ग बनाता है।

दो-तीन प्रमुख विषय

  • आस्था और आशीष का पीछा: कनान लौटना एक धार्मिक-निष्ठ निर्णय है, जो पिता के आशीष और परमेश्वर की वादा की ओर संकेत करता है।
  • संयोजन और परिवार-उन्नति: याकूब अपने परिवार को एक साथ लेकर चल रहा है, ताकि वे एक सुरक्षित और स्थिर जीवन बना सकें।
  • धन और संपत्ति का स्थान: पशु-धन के साथ यात्रा एक आर्थिक सुरक्षा देता है और भविष्य की योजनाओं के लिए आधार बनता है।

CORRESPONDING CROSS-References (संवेदना मार्गदर्शक संकेत)

1) उ্চः उत्पत्ति 28:15 - परमेश्वर ने याकूब के साथ वादा किया, “मैं तेरे साथ रहूँगा और जहां जाऊँगा, वहाँ तुझें भी ले चलूँगा।” यह पंक्ति इस कदम के आध्यात्मिक आधार को दर्शाती है।

2) उत्पत्ति 32:10 - “मैं जो कुछ हूँ, वह तेरे कारण हूँ”—याकूब का आत्म-विद्यमानता और ईश्वर की कृपा पर भरोसा।

3) उत्पत्ति 33:3-4 - याकूब की यात्रा का अंतिम चरण: अपने भाय-बंधुओं के साथ मिलन और क्षमा-भाव।

प्रायोगिक विचार

जो पाठ दर्शाता है, वह यह कि जीवन में नया आरंभ चाहना और परिवार की सुरक्षा सबसे ऊपर होती है। परन्तु धन-संपदा ले आना एक सुरक्षित मार्ग बन सकता है; फिर भी परमेश्वर की वादाओं पर भरोसा रखना आवश्यक है। अभ्यास के रूप में आप अपने परिवार के लिए एक छोटे-से लक्ष्य का निर्धारण करें—जैसे नौकरी से मुक्त समय में स्मृति-यादों के साथ एक नई योजना बनाना—ताकि आस्था और व्यवहार संतुलित रहें।

संक्षिप्त सार

उत्पत्ति 31:18 में याकूब का कनान लौटना और पितृ-आशीष की दिशा में बढ़ना, उनके जीवन के एक नए अध्याय की पुष्टि करता है। यह उनके धर्म-निष्ठ उद्देश्य, पारिवारिक सुरक्षा, और संपत्ति-व्यवस्था के समन्वय का प्रतीक है—जो परमेश्वर की योजना के प्रति विश्वास को दर्शाता है।

यूनानी निष्कर्ष

इस मार्ग का संदेश है: परिवार सहयोग, आस्था-युक्त अगुवाई, और भविष्य के लिए सुविचारित योजना—ताकि ईश्वर के वादे के अनुरूप आगे बढ़ना संभव हो।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

उत्पत्ति 31:18 समानांतर पद और संबंधित वचन

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और याकूब मम्रे में, जो किर्यतअर्बा, अर्थात् हेब्रोन है, जहाँ अब्राहम और इसहाक परदेशी होकर रहे थे, अपने पिता इसहाक के पास आया। (इब्रा. 11:9)

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और मैं अपने पिता के घर में कुशल क्षेम से लौट आऊँ; तो यहोवा मेरा परमेश्‍वर ठहरेगा।

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जब इसहाक बूढ़ा हो गया, और उसकी आँखें ऐसी धुंधली पड़ गईं कि उसको सूझता न था, तब उसने अपने जेठे पुत्र एसाव को बुलाकर कहा, “हे मेरे पुत्र,” उसने कहा, “क्या आज्ञा।”

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