उत्पत्ति 31:53 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

अब्राहम और नाहोर और उनके पिता; तीनों का जो परमेश्‍वर है, वही हम दोनों के बीच न्याय करे।” तब याकूब ने उसकी शपथ खाई जिसका भय उसका पिता इसहाक मानता था।

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उत्पत्ति 31:53 पद-दर-पद बाइबल टीका

सीधे मतलब का सार (Meaning in brief)

उत्पत्ति 31:53 का यह वाक्य कहता है कि अब्राहम, नाहोर और उनके पिता—तीनों का परमेश्वर जो हमारे बीच न्याय करेगा—वह हम दोनों (याकूब और लावान) के बीच न्याय करें। यह शपथ-उच्चारण विश्वासयोग्य संबंध और प्रभु के न्याय को स्वीकार करने की प्रतिबद्धता है।

पृष्ठभूमि और संदर्भ (Contextual background)

याकूब और लावान के बीच जारी संघर्ष के वक्त यह वचन आता है। याकूब ने परमेश्वर की सहायता से अपनी स्थिति को सुधारने की कोशिश की है, और यह शपथ उसी परंपरा की पुष्टि है कि परमेश्वर ही उनके बीच सही-न्याय करेगा, भले ही मनुष्य कुछ-कुछ भूमिका अदा कर दें। यह भी संकेत देता है कि पूर्वजों का परमेश्वर एक दायित्वपूर्ण अभिभावक है जो परिवार-व्यवस्था में न्याय स्थापित करना चाहता है।

व्याख्या के नोट (Interpretive observations)

  • यह वचन परमेश्वर के समान्य न्याय की याद दिलाता है, न कि मनुष्यों के पक्षपातपूर्ण फैसलों पर निर्भर रहने के लिए।
  • “हम दोनों के बीच न्याय करे” से यह स्पष्ट होता है कि संबंधों में सही-गलत की कानूनी और नैतिक मानक परमेश्वर से आने चाहिए।
  • पिता की मान्यता से संकेत मिलते हैं कि सावधानीपूर्वक और सत्यनिष्ठ प्रतिज्ञाओं पर भरोसा करना चाहिए; शपथ का महत्त्व परिवार-ड्रामा में स्थिरता लाती है।

छोटा विचार-सूची (Thematic highlights)

  • परमेश्वर के न्याय की पुष्टि
  • पारिवारिक शपथ और विश्वास-निष्ठता
  • पूर्वजों के आशीर्वाद और उनकी पवित्रता

अन्य प्रत्यक्ष संदर्भ (Cross-references) और उनके तात्पर्य

1) उत्पत्ति 28:15 — परमेश्वर का वादा: “तुम्हारे साथ मैं हूँ”—याकूब के लिए दयालुता का आधार। यह संदर्भ यहाँ न्याय के भरोसे को बल देता है कि परमेश्वर पथ-निर्देशन देगा।

2) उत्पत्ति 50:19-20 — जो बुरा कर रहा है वह भी परमेश्वर के उद्देश्य के अनुसार सुधर सकता है; यहाँ निष्कर्ष यह है कि परमेश्वर एक संकल्पित न्यायपालक है जो अत्यंत कठिन परिस्थितियों में भी मार्ग दिखाता है।

3) उत्पत्ति 32:9-12 — याकूब की प्रार्थना और भरोसा कि परमेश्वर नींव रखने वाला है; यह वचन न्याय और सुरक्षा के दायरे में एक आशीर्वाद देता है।

संश्लेषणात्मक टिप्पणी (Integrated summary)

इस वचन में परमेश्वर के न्याय को परिवार-जीवन की संरचना में केंद्रीय स्थान दिया गया है: पिता-पूर्वजों के परमेश्वर के सामने शपथ और विश्वास की भूमिका दिखती है। Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार-सार विचारों में अक्सर यही बात उभरती है कि परमेश्वर की सत्यनिष्ठा और न्यायदृष्टि ही रिश्तों-सम्बंधों को स्थिर बनाती है; मनुष्य की कठोरता या पक्षपात क्षणिक हो सकता है, पर परमेश्वर का न्याय शाश्वत है। “अब्राहम और नाहोर और उनके पिता; तीनों का जो परमेश्वर है, वही हम दोनों के बीच न्याय करे”—यह शपथ एक आध्यात्मिक गठजोڑ है जिसमें परिवार के सभी सदस्य परमेश्वर-निर्देशक मार्ग पर चलने का संकल्प लेते हैं।

व्यावहारिक takeaway (Practical takeaway)

  • परिवार में विवाद के समय परमेश्वर के न्याय को सर्वोपरि मानना चाहिए, ताकि समस्याएं शांति और सुरक्षा में हल हों।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

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मेरे पिता का परमेश्‍वर अर्थात् अब्राहम का परमेश्‍वर, जिसका भय इसहाक भी मानता है, यदि मेरी ओर न होता, तो निश्चय तू अब मुझे खाली हाथ जाने देता। मेरे दुःख और मेरे हाथों के परिश्रम को देखकर परमेश्‍वर ने बीती हुई रात में तुझे डाँटा।”

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तब सारै ने अब्राम से कहा, “जो मुझ पर उपद्रव हुआ वह तेरे ही सिर पर हो। मैंने तो अपनी दासी को तेरी पत्‍नी कर दिया; पर जब उसने जाना कि वह गर्भवती है, तब वह मुझे तुच्छ समझने लगी, इसलिए यहोवा मेरे और तेरे बीच में न्याय करे।”

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तब यहोशू ने उन सब लोगों से कहा, “इस्राएल का परमेश्‍वर यहोवा इस प्रकार कहता है, कि 'प्राचीनकाल में अब्राहम और नाहोर का पिता तेरह आदि, तुम्हारे पुरखा फरात महानद के उस पार रहते हुए दूसरे देवताओं की उपासना करते थे।

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