यशायाह 37:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

उन्होंने उससे कहा, “हिजकिय्याह यह कहता है कि 'आज का दिन संकट और उलाहने और निन्दा का दिन है, बच्चे जन्मने पर हुए पर जच्चा को जनने का बल न रहा।

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यशायाह 37:3 पद-दर-पद बाइबल टीका

यशायाह 37:3 पर प्रकाश: संकट के दिन की अहमियत

इस पद का मकसद यह बताना है कि राजा हिजकिय्याह के समय इस संकटपूर्ण दिन की अवस्था कितनी गंभीर थी और उसकी प्रतिक्रिया से यह स्पष्ट होता है कि परमेश्वर के पास ही उद्धार है। यह verse हमें यह याद दिलाता है कि जब आपात और उलाहना के समय में आते हैं, तब ईश्वर की गंभीरता और उसकी सहायता दोनों स्पष्ट हो जाती हैं।

परोहित संदर्भ और मूल सन्देश

यशायाह 37 में शानहिज़ा के बेदखली के समय आ गया है कि असुर सामंती शक्तियाँ यरूशलेम पर टूट पड़ती हैं। नन्हीं-सी उम्मीद के साथ लोग हिजकिय्याह को बुलाते हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि यह संकट कड़ा है। verse 3 में उनसे कहा गया कि यह “आज का दिन संकट और उलाहने और निन्दा का दिन है”—यानी यह वह क्षण है जब बाहर के खतरे के अलावा आंतरिक डर भी उभरा है। जच्चा के जन्म के कारणों का अलंकारिक उल्लेख यहाँ है कि संघर्ष के समय न सिर्फ सामरिक, बल्कि सामाजिक और व्यक्तिगत पीड़ा भी गहराती है।

मुख्य विचार

  • संकट का वास्तविक टकराव: यह दिन सिर्फ युद्ध का दिन नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक दबावों का भी दिन है।
  • आशाय की कमी से आत्म-विश्वास की कमी: जब लोगों के पास सुरक्षा के स्रोत नहीं होते, वे परमेश्वर की ओर देखने लगते हैं।
  • उद्धार का मार्ग परमेश्वर के पक्ष में है: चरित्र और आस्था उसी समय उभरती है जब सब कुछ टूट-फूट रहा हो।

छोटी दार्शनिक पुख़्ता सहारा (cross-references)

ये संदर्भ बालक-सीखे के समान हैं, जिनमें संकट के समय परमेश्वर की स्तुति और सहायता की पुष्टि मिलती है:

  • यशायाह 38;14-17 — श्वास के संग मृत्यु की आसन्नता के बीच ईश्वर की कृपा और रोग-चिकित्सा की आशा दिखती है।
  • इब्रानियों 11:23-27 — आस्था के साहस से खतरे में भी विश्वासी परमेश्वर को चुने रहते हैं, जैसे मसीहा के अभिगम में मिसाल बनती है।
  • यशायाह 30:15 — शान्ति और विश्राम की ओर रिटर्न, जहाँ निर्भय होकर परमेश्वर पर निर्भर रहना उत्तम मार्ग है।

इन पोर्टलों से समझ में आता है कि संकट के क्षण में भी परमेश्वर की योजना और विश्वास की स्थिति पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, ไม่ कि भय में डूबना।

पापड-आउटफाल: पूर्वकथा से सीख

परमेश्वर के दायरे में रहने की सीख के रूप में, अंतःकरण की धारणाओं पर ध्यान दें: संकट के दौरान आवाज़ें दब जाती हैं, पर ईश्वर की बात और उसकी कृपा स्पष्ट रहती है। यह verse कहता है कि मानव-निर्भरता कितनी अस्थिर है, और परमेश्वर की स्तुति और विश्वास कितनी स्थिर रहते हैं।

संक्षिप्त देवotional विचार

कठिन समय में भी, हमारा पहला कदम ईश्वर के सामने शीघ्रता से समर्पण होना चाहिए। जब दुःख और उलाहना बढ़ती है, तब भी परमेश्वर का सच्चा उद्देश्य उभरता है—हमारी निर्भरता को उसकी कृपा पर बनाए रखना। आपातकाल इनकी परीक्षा लेता है, पर ईश्वर के क़ायदे में आस्था बनी रहती है।

निष्कर्ष

यशायाह 37:3 बताता है कि संकट के समय न सिर्फ बाहरी खतरे बल्कि आंतरिक कमजोरियां भी सामने आती हैं। पर इसी क्षण में ईश्वर की सहायता उपलब्ध रहती है, जब हम उसे पुकारते हैं और विश्वास के साथ उसकी ओर देखते हैं।

नोट: इस पंक्ति के बारे मेंMatthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के छोटे उद्धरण यदि उपलब्ध हों तो नीचे से उद्धृत किए जा सकते हैं।

उद्धरण संकेत: “…

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यशायाह 37:3 समानांतर पद और संबंधित वचन

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उन्होंने उससे कहा, “हिजकिय्याह यह कहता है, आज का दिन संकट, और भर्त्सना, और निन्दा का दिन है; बच्चों के जन्म का समय तो हुआ पर जच्चा को जन्म देने का बल न रहा।

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