Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यशायाह 1 यशायाह 2 यशायाह 3 यशायाह 4 यशायाह 5 यशायाह 6 यशायाह 7 यशायाह 8 यशायाह 9 यशायाह 10 यशायाह 11 यशायाह 12 यशायाह 13 यशायाह 14 यशायाह 15 यशायाह 16 यशायाह 17 यशायाह 18 यशायाह 19 यशायाह 20 यशायाह 21 यशायाह 22 यशायाह 23 यशायाह 24 यशायाह 25 यशायाह 26 यशायाह 27 यशायाह 28 यशायाह 29 यशायाह 30 यशायाह 31 यशायाह 32 यशायाह 33 यशायाह 34 यशायाह 35 यशायाह 36 यशायाह 37 यशायाह 38 यशायाह 39 यशायाह 40 यशायाह 41 यशायाह 42 यशायाह 43 यशायाह 44 यशायाह 45 यशायाह 46 यशायाह 47 यशायाह 48 यशायाह 49 यशायाह 50 यशायाह 51 यशायाह 52 यशायाह 53 यशायाह 54 यशायाह 55 यशायाह 56 यशायाह 57 यशायाह 58 यशायाह 59 यशायाह 60 यशायाह 61 यशायाह 62 यशायाह 63 यशायाह 64 यशायाह 65 यशायाह 66Verse
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reader-friendly overview
यशायाह 37:38 एक ऐसे क्षण का वर्णन करता है जब श्रीमान-राज राजा के अंतर्गत परजीवी और पथभ्रष्ट न्याय-प्रबंध का परिणाम सामने आता है। यहाँ असुर साम्राज्य के घातक विरोधी निस्रोक के मंदिर में पिता की मूर्तिपूजा के बीच बेटे अद्रम्मेलेक और शरेसेर ने चमत्कारिक घटनाक्रम के माध्यम से सत्ता परिवर्तन कर डाला। यह पंक्ति सीधे यह दर्शाती है कि परमेश्वर के विरुद्ध चलने वालों के लिए राज-सत्ता कितनी अस्थिर और अस्थायी हो जाती है, तथा नयी सत्ता के आगमन में परम पावन योजना की भूमिका स्पष्ट होती है।
Verse-by-verse in its chapter
यशायाह 37:38 में सूचित किया गया है कि जब यहूदी राजा असार्याह (सहाय) अपने देव-भक्त निस्रोक के मन्दिर में दण्डवत् कर रहा था, तो उसके पुत्र अद्रम्मेलेक और शरेसेर ने उसको तलवार से मार दिया और अरारात देश में भाग गए; और उसका पुत्र एसर्हद्दोन उसके स्थान पर राज्य करने लगा। यह घटना नतीजे में साम्राज्य के भीतर विद्रोह और अस्थिर सत्ता की तस्वीर है, जो एक समय की नज़रों के सामने परमेश्वर की कड़ी न्याय और कड़ाई का संकेत भी है।
main spiritual lesson
1) परमेश्वर के विरुद्ध चलने की कीमत: जिस राजा ने निस्रोक के मन्दिर के सामने प्रत्यक्ष जकड़ता दिखाया, उसे अपने ही पुत्रों के कंधों पर सत्ता से हटना पड़ा। यह स्पष्ट करता है कि भौतिक शक्ति और नीतिगत चालबाज़ियाँ क्षण भर टिक नहीं पातीं जब वे परमेश्वर के उद्देश्य के विरुद्ध जाती हैं।
2) उत्तरदायित्व और नस्ती-योजना: इस घटनाक्रम के साथ यह दिखता है कि परमेश्वर के न्याय के कदम कभी अदृश्य नहीं रहते—वह समय के अनुसार पापियों के ठिकाने बनाता है और उनके स्थान पर सचेत और प्रेरित नेतृत्व को स्थापित करता है।
cross-references with brief explanations
careful application
- हर परिस्थिति में विश्वास की दृढ़ता बनाए रखें: जब सत्ता और मान-यथार्थ अस्थिर होते दिखते हैं, तब भी परमेश्वर की नीति और न्याय की दिशा में चलना चाहिए।
- विद्रोह और दमन के समय में नैतिकता का पालन करें: सत्ता-जोखिम के बावजूद सत्य, नम्रता, और निष्कलंक आत्म-परख चाहिए—जिनसे भीतर की शक्ति परमेश्वर के साथ बनी रहती है।
concise summary
यशायाह 37:38 दर्शाता है कि जब आधुनिक साम्राज्य ने देव-पूजा की परंपरा और सत्ता-आस्थाओं के बीच अस्थिरता दिखलाई, तब परमेश्वर के न्याय ने एक के बाद एक चरणों में सत्ता के परिवर्तन को संचालित किया। अद्रम्मेलेक और शरेसेर की हत्या से सत्ता नया रूप लेती है, और एसर्हद्दोन उस स्थान पर आकर खड़ा होता है। यह दृश्य हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर के विरुद्ध की गई हर चाल अंततः उसकी योजनाओं के अनुरूप नहीं टिकती।
महत्त्वपूर्ण उद्धरण नोट: Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के सीधे पूर्ण उद्धरण इस पन्ने में उपलब्ध स्रोत-पथ के भीतर इस पाठ के अनुरूप संकलित नहीं हैं, पर उनके विचार यह संकेत करते हैं कि सत्ता-परिवर्तन परमेश्वर की व्यवस्था के भाग हैं और पाप का परिणाम मुकम्मल न्याय ही होता है।