Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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यशायाह 37:23 पर टिप्पणी: घमण्ड और यहोवा के विरुद्ध उपहास
मुख्य interpretive बिंदु: ईश्वरीय दहला देने वाले सवाल के साथ परमेश्वर के यहूदा पर दशा-घमण्ड का पश्चातापी संदेश। राजाओं के दम्भ, निन्दा और हठ से उभरे अभिमान को परमेश्वर ने उसी सतर्क चेतावनी के साथ उखाड़फेंकने का निर्णय कहा है, जो इस्राएल के पवित्र नाम के विरुद्ध किया गया। यह वाक्य इंगित करता है कि परमेश्वर के सामने किसी भी मानव महत्त्व या जान-बूझ कर की गई ध्वनियाँ भुला दी जाती हैं; उसकी पवित्रता और सत्ता का सत्य सभी धारणाओं से ऊँचा है।
साहित्यिक संदर्भ (पाठ की संरचना के भीतर)
यशायाह 37 में अज़र्याह (अहाक के समय) असुर के विरुद्ध यहोवा की नीतियों का उद्घोष करते हैं। इस अंश में शैलुलती रेखा वह है: राजा की निन्दा, घमण्ड और externally आक्रमण की भाषा—परमेश्वर के विरुद्ध की गई सूचकता—जो यहूदियों के लिए एक चेतावनी है कि प्रबल बाहरी शक्ति के सामने भी परमेश्वर के नाम का अपमान घातक परिणाम है। यह संदेश यहूदा के पवित्र परमेश्वर के सम्मान के साथ जुड़कर न्याय और दया दोनों के आयाम खोलता है।
थियोलॉजिकल महत्व
यह पंक्ति एक साफ-प्याला परीक्षण है: जब मानवीय अहंकार परमेश्वर के नाम और उसकी पवित्रता के विरुद्ध उड़ता है, तब उसे दण्ड और निचोड़ के साथ जवाब मिलता है। यहूदियों के लिए यह शिक्षण है कि विश्वास और विनय में ही शक्ति है; घमण्ड से बचना और ईश्वर के विरुद्ध अपमान से बचना परमेश्वर के लोग बनाने की कुंजी है।
पवकलन-योजनाओं से संबंध (Scripture Cross-References)
विवेचना के प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
यशायाह 37:23 परमेश्वर के विरुद्ध बोले गये हठ और निन्दाओं के प्रश्न उठाता है कि जो लोग पवित्र के विरुद्ध बोलते हैं, वे अपने आप को उच्च मान लेते हैं, परन्तु परमेश्वर उन सभी को सहन नहीं करते। यह वाक्य हमें विनम्रता, विश्वास-समर्थन और ईश्वर के सम्मान के लिए नीत-आचरण की याद दिलाता है।
पूर्व-गुणवत्ता उद्धरण (संदर्भित पवित्र-टीका से)
यदि कोई स्पष्ट उद्धरण हो, तो ध्यान दें: इस अध्याय के अनुसार, घमण्ड और परमेश्वर के विरुद्ध ताने-बाने के प्रति सख्त चेतावनी दी गई है; यह Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke की सार्वजनिक-डायरेक्ट टिप्पणी-धारा में प्रभाव दिखाती है।