यशायाह 37:23 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

'तूने किसकी नामधराई और निन्दा की है? और तू जो बड़ा बोल बोला और घमण्ड किया है, वह किसके विरुद्ध किया है? इस्राएल के पवित्र के विरुद्ध!

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यशायाह 37:23 पद-दर-पद बाइबल टीका

यशायाह 37:23 पर टिप्पणी: घमण्ड और यहोवा के विरुद्ध उपहास

मुख्य interpretive बिंदु: ईश्वरीय दहला देने वाले सवाल के साथ परमेश्वर के यहूदा पर दशा-घमण्ड का पश्चातापी संदेश। राजाओं के दम्भ, निन्दा और हठ से उभरे अभिमान को परमेश्वर ने उसी सतर्क चेतावनी के साथ उखाड़फेंकने का निर्णय कहा है, जो इस्राएल के पवित्र नाम के विरुद्ध किया गया। यह वाक्य इंगित करता है कि परमेश्वर के सामने किसी भी मानव महत्त्व या जान-बूझ कर की गई ध्वनियाँ भुला दी जाती हैं; उसकी पवित्रता और सत्ता का सत्य सभी धारणाओं से ऊँचा है।

साहित्यिक संदर्भ (पाठ की संरचना के भीतर)

यशायाह 37 में अज़र्याह (अहाक के समय) असुर के विरुद्ध यहोवा की नीतियों का उद्घोष करते हैं। इस अंश में शैलुलती रेखा वह है: राजा की निन्दा, घमण्ड और externally आक्रमण की भाषा—परमेश्वर के विरुद्ध की गई सूचकता—जो यहूदियों के लिए एक चेतावनी है कि प्रबल बाहरी शक्ति के सामने भी परमेश्वर के नाम का अपमान घातक परिणाम है। यह संदेश यहूदा के पवित्र परमेश्वर के सम्मान के साथ जुड़कर न्याय और दया दोनों के आयाम खोलता है।

थियोलॉजिकल महत्व

यह पंक्ति एक साफ-प्याला परीक्षण है: जब मानवीय अहंकार परमेश्वर के नाम और उसकी पवित्रता के विरुद्ध उड़ता है, तब उसे दण्ड और निचोड़ के साथ जवाब मिलता है। यहूदियों के लिए यह शिक्षण है कि विश्‍वास और विनय में ही शक्ति है; घमण्ड से बचना और ईश्वर के विरुद्ध अपमान से बचना परमेश्वर के लोग बनाने की कुंजी है।

पवकलन-योजनाओं से संबंध (Scripture Cross-References)

  • यहन्ना 12:43 — लोग जिन्होंने मान-सीमा चाही, परन्तु ईश्वर के सामने नतमस्तक नहीं हुए; यह पंक्ति इस आशय को पुष्ट करती है कि मान्यता और ध्वंस में कहाँ संतुलन होना चाहिए।
  • यिर्मयाह 9:23-24 — न समझदार नहीं-बल, न प्रसिद्धि से, परन्तु यह कि वहUnderstand करे कि उसे कौन जानता है; परमेश्वर की महिमा अज्ञान-घमण्ड से ऊपर है।
  • रोम 12:3 — प्रत्येक को अपने अनुसार विचार करना कि वह भी मापदण्ड के अनुसार न रहे; विनम्रता और शांत विचारधारा यह बताती है कि क्षेत्र में कौन-सी आस्था सही दिशा में है।

विवेचना के प्रश्न

  • हम अपने जीवन में किन-किन जगहों पर घमण्ड के संकेत दिखाते हैं जिनसे परमेश्वर की पवित्रता पर असर पड़ सकता है?
  • देश-राज्य के संकट के बीच हम अपनी माँगों के बजाय ईश्वर की योजना को कैसे प्राथमिकता दें?
  • क्या आपके लिए विनम्रता और भीषण सच्चाई स्वीकारना कठिन है? क्यों?

संक्षिप्त निष्कर्ष

यशायाह 37:23 परमेश्वर के विरुद्ध बोले गये हठ और निन्दाओं के प्रश्न उठाता है कि जो लोग पवित्र के विरुद्ध बोलते हैं, वे अपने आप को उच्च मान लेते हैं, परन्तु परमेश्वर उन सभी को सहन नहीं करते। यह वाक्य हमें विनम्रता, विश्वास-समर्थन और ईश्वर के सम्मान के लिए नीत-आचरण की याद दिलाता है।

पूर्व-गुणवत्ता उद्धरण (संदर्भित पवित्र-टीका से)

यदि कोई स्पष्ट उद्धरण हो, तो ध्यान दें: इस अध्याय के अनुसार, घमण्ड और परमेश्वर के विरुद्ध ताने-बाने के प्रति सख्त चेतावनी दी गई है; यह Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke की सार्वजनिक-डायरेक्ट टिप्पणी-धारा में प्रभाव दिखाती है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यशायाह 37:23 समानांतर पद और संबंधित वचन

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यहेजकेल 39:7 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यहेजकेल 39:7 (HINIRV) »
“मैं अपनी प्रजा इस्राएल के बीच अपना नाम प्रगट करूँगा; और अपना पवित्र नाम फिर अपवित्र न होने दूँगा; तब जाति-जाति के लोग भी जान लेंगे कि मैं यहोवा, इस्राएल का पवित्र हूँ।

दानिय्येल 5:20 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
दानिय्येल 5:20 (HINIRV) »
परन्तु जब उसका मन फूल उठा, और उसकी आत्मा कठोर हो गई, यहाँ तक कि वह अभिमान करने लगा, तब वह अपने राजसिंहासन पर से उतारा गया, और उसकी प्रतिष्ठा भंग की गई; (नीति. 16:15)

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यशायाह 17:7 (HINIRV) »
उस समय मनुष्य अपने कर्ता की ओर दृष्टि करेगा, और उसकी आँखें इस्राएल के पवित्र की ओर लगी रहेंगी;

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