यिर्मयाह 49:24 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

दमिश्क बलहीन होकर भागने को फिरती है, परन्तु कँपकँपी ने उसे पकड़ा है, जच्चा की सी पीड़ा उसे उठी हैं।

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यिर्मयाह 49:24 पद-दर-पद बाइबल टीका

सीधे अर्थ का सार

यिर्मयाह 49:24 में दमिश्क की विपदा को दर्शाते हुए कहा गया है कि वह शक्तिहीन होकर भागना चाहती है, परन्तु भय और विकट संकट उसे घेर लेते हैं — उसकी पीड़ा माँ की प्रसव पीड़ा की तरह उठती है और उसे चीरती है। यह संकेत है कि दुष्ट नगरों की उनकी शक्ति क्षीण हो जाती है और परमेश्वर के निर्णय से उनके भीतर का भय और असहायता उजागर होता है।

प्रसंग-परिप्रेक्ष्य

यिर्मयाह नबी के समय बाबुल के बंधन के बाद भी क्षेत्रीय शिथिलता और अन्य पड़ोसी देशों के साथ संघर्षों के बीच दमिश्क के लिए भी नयी दुष्प्रवृत्तियों का संदेश है। यिर्मयाह के पाठ में दमिश्क एक समृद्ध किन्तु आत्म-तुष्टि में फंसी राजधानी के रूप में प्रस्तुत है, जो परमेश्वर के न्याय से बच नहीं सकती। यह पवित्रशास्त्र का एक भाग है जिसमें नबी ने अति-आत्म-विश्वास और ग़लत सुरक्षितता के परिणामों को रेखांकित किया है।

व्याख्यात्मक निष्कर्ष

  • शक्ति का क्षय: दमिश्क की शक्ति खतरे में है और वह भागना चाहती है, जिससे उसकी असुरक्षा स्पष्ट होती है।
  • आंतरिक भय: "कँपकँपी ने उसे पकड़ लिया" से पता चलता है कि वह बाहरी खतरे से अधिक आंतरिक भय से पीड़ित है।
  • गंभीर प्रसव-पीड़ा: प्रत्यक्ष रूप से एक दर्दभरी मुसीबत के रूप में दिखाया गया है, जो उच्च-स्तरीय दमन और वर्ग-संरचना के अंत में उभरती है।

संकेत-प्रत्यय (Cross-references) और संक्षिप्त स्पष्टीकरण

- यिर्मयाह 25:9-10 — अन्य देशों के विरुद्ध परमेश्वर की क्रोध के संकेत; यह बताता है कि राष्ट्रों की सुरक्षा परमेश्वर की इच्छा से जुड़ी है, न कि अपनी शक्ति से।
- यिर्मयाह 46:28 — अन्य राष्ट्रों के लिए आशा की बात भी है कि परमेश्वर के सामने भी कुछ स्थान सुरक्षित रहता है; फिर भी वे तितर-बितर हो सकते हैं अगर वे परमेश्वर की नीति से विमुख हों।
- תהלים 46:3 — विपत्ति के समय परमेश्वर का सहारा और शांति की भूमिका; भय के बीच भी उसने अपने लोगों को स्थिरता दी है।

इन संदर्भों से स्पष्ट है कि राष्ट्र की शक्ति कितनी भी मजबूत क्यों न हो, परमेश्वर के सिंहासन के सामने उसका टिकना नहीं है; भय और असुरक्षा तब उभरते हैं जब वे अपनी रक्षा केवल अपने आप पर करते हैं।

छोटी थीमैटिक सूची

  1. परमेश्वर की न्याय की सीमा: आकर्षित शक्ति के स्थान पर उसकी मर्जी सर्वोपरि है।
  2. आंतरिक भय का प्रभाव: बाहर की विपत्ति मिलकर भी आत्मा के भय को बढ़ाता है।
  3. उद्धार का संकेत: संकट से उभरना सिखाता है कि कैसे देवत्व-निष्ठ राष्ट्र अपने कर्तव्य को पुनः पहचानें।

व्यावहारिक अनुप्रयोग

हम क्यों न अपने भीतर के भय और निर्भरता के क्षणों पर विचार करें? चाहे विपत्ति किसी नगर को निशाने पर ले, या व्यक्तिगत जीवन में दबाव बढ़े, परमेश्वर की शिक्षा यही है कि हमारी रक्षा उसकी कृपा और वादे पर टिके। आत्म-विश्वास से नहीं, बल्कि उसकी शक्ति पर टिके रहें।

यदि आप Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke से संक्षेप उद्धरण मांगते हैं

यह नोट किया जा सकता है कि इन पवित्र टिप्पणीकारों ने पश्च-भाषा में राहत और न्याय के लिए परमेश्वर के निर्णयों को समझाने का प्रयास किया है, परन्तु यहाँ उद्धरण के पूर्ण टेक्स्ट को नहीं रखा गया है; उनके विचारों के अनुसार दमिश्क के प्रसंग में यह प्रतीक है कि मानव-सत्ता भी परमेश्वर के न्याय से बच नहीं सकती।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यिर्मयाह 49:24 समानांतर पद और संबंधित वचन

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