यिर्मयाह 49:7 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

एदोम के विषय, सेनाओं का यहोवा यह कहता है: “क्या तेमान में अब कुछ बुद्धि नहीं रही? क्या वहाँ के ज्ञानियों की युक्ति निष्फल हो गई? क्या उनकी बुद्धि जाती रही है?

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यिर्मयाह 49:7 पद-दर-पद बाइबल टीका

यिर्मयाह 49:7 पर टिप्पणी

यह पद यिर्मयाह के मिथ्यापूर्ण आशीर्वादों और पड़ोसियों के व्यवहार के संदर्भ में एडोम के बारे में परमेश्वर की प्रतिक्रिया को उद्घाटित करता है। यिर्मयाह नबियों का संदेश इस बात की चेतावनी है कि पड़ोसी राष्ट्र भी अपनी नीति और बुद्धि से मानव-निर्भरता के पाटों में फँस जाते हैं। एडोम, जो यहूदा के पड़ोसी और इस्राइल के इतिहास के कठिन इशारों से जुड़ा देश था, उसे सूचना दी जाती है कि उसकी बुद्धि और ज्ञान भी परमेश्वर के दिव्य निर्णय के सामने निष्फल हो जाती है। यह verse यह बताता है कि जब मनुष्यता अपनी महान्याय-युक्ति पर भरोसा करती है, तब परमेश्वर उनकी योजना को उलट सकता है।

मुख्य मतलब

इस वाक्य में यहोवा एडोम की “युक्ति” और “ज्ञान” पर प्रश्न उठाते हैं—क्या उनके भीतर बुद्धि शेष है? क्या वे अपनी नीति से सफल होंगे? उत्तर स्पष्ट है: मानव-नीति सीमित है और परमेश्वर की योजना से आँका जाता है। यह संदेश यह दर्शाता है कि दुष्ट देशों की चाल में त्रुटि की संभावना है और परमेश्वर उन योजनाओं को भी पलट सकता है जो उसने अपने परम उद्देश्य के विरुद्ध बनायीं हों।

तीन प्रमुख विषय

  1. निजी बुद्धि की अस्थिरता: मानव-युक्तियाँ शारीरिक, राजनीतिक और कूटनीतिक लाभ के लिए बनती हैं, पर वे परमेश्वर के नियंत्रण के बिना टिक नहीं पातीं।
  2. परमेश्वर की न्याय-योजना: एडोम के बारे में यह उद्घोषणा यह स्मरण दिलाती है कि हर राष्ट्र की योजना एक दिन प्रभु के न्याय के चक्र में आकर निर्गुण हो जाती है।
  3. निगाह में सत्य की दृष्टि: जो लोग डर और मार्गदर्शन के बिना आगे बढ़ते हैं, वे अंततः अपने ही बहाने में फँस जाते हैं।

संबद्ध बाइबल पाठ और उनके संकेत

- यिर्मयाह 49:5–6 में प्रभु एडोम के लिए उद्धार और परिभ्रमण की योजना का संकेत देता है।

- नीतिवचन या अन्य नबी-संदेशों में मानव-योजना बनाम परमेश्वर की इच्छा के संघर्ष के उदाहरण मिलते हैं, जो हमें यह समझाते हैं कि ईश्वर सर्वव्यापक रूप से सत्ता में है।

व्यावहारिक विचार

हम अपने समय के राष्ट्रों और नेताओं की नीतियों को देखें तो यह स्पष्ट होता है कि दिव्यमान और मानवीय नीतियाँ कभी-ek-ही-समय पर भिड़ जाती हैं। लागू मार्ग यह है कि हम परमेश्वर की योजना पर टिके रहें, न कि मानव-युक्ति पर भरपूर भरोसा करें। प्रार्थना और पवित्रशास्त्र के अनुरोध से विवेक मिलता है ताकि बुद्धि के निर्णयों में दया, न्याय और सत्य का मार्ग चुना जाए।

Cross-references (संकेत परिसर)

- व्यवस्थावस्था 21:16 से प्रेरणा मिलती है कि मनुष्य की बुद्धि समय के अनुसार सीमाओं के भीतर है; परमेश्वर के उद्देश्य उससे परे हैं।

- इब्रानी 4:12 दिखाता है कि परमेश्वर की वाक्य और विचार सच और धारदार हैं; इंसानों की योजनाओं की तुलना में यह स्पष्ट रूप से अधिक सटीक है।

- योना 1:9 में दिखता है कि हर राष्ट्र की नीतियाँ परमेश्वर की दी गयी राह में एक चुनौती बन सकती हैं, परन्तु परमेश्वर उकेरे गए मार्ग को चलवाते हैं।

छोटा सार

यिर्मयाह 49:7 यह याद दिलाता है कि एडोम सहित सभी राष्ट्र-योजनाएँ परमेश्वर के सामने नाजुक हैं। मानव बुद्धि चाहे कितनी भी कुशल क्यों न हो, वह divine निर्देश के सामने निर्बल है। विश्वासियों के लिए यह संदेश विवेक के साथ परमेश्वर की योजना की ओर देखने और अपने राजनीतिक-योजनाओं के बजाय परमपिता-ईश्वर के मार्ग ग्रहण करने की प्रेरणा है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यिर्मयाह 49:7 समानांतर पद और संबंधित वचन

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तब एसाव ने याकूब से कहा, “वह जो लाल वस्तु है, उसी लाल वस्तु में से मुझे कुछ खिला, क्योंकि मैं थका हूँ।” इसी कारण उसका नाम एदोम भी पड़ा।

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एसाववंशियों के अधिपति ये हुए: अर्थात् एसाव के जेठे एलीपज के वंश में से तो तेमान अधिपति, ओमार अधिपति, सपो अधिपति, कनज अधिपति,

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और एलीपज के ये पुत्र हुए; अर्थात् तेमान, ओमार, सपो, गाताम, और कनज।

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