Old Testament
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यिर्मयाह 1 यिर्मयाह 2 यिर्मयाह 3 यिर्मयाह 4 यिर्मयाह 5 यिर्मयाह 6 यिर्मयाह 7 यिर्मयाह 8 यिर्मयाह 9 यिर्मयाह 10 यिर्मयाह 11 यिर्मयाह 12 यिर्मयाह 13 यिर्मयाह 14 यिर्मयाह 15 यिर्मयाह 16 यिर्मयाह 17 यिर्मयाह 18 यिर्मयाह 19 यिर्मयाह 20 यिर्मयाह 21 यिर्मयाह 22 यिर्मयाह 23 यिर्मयाह 24 यिर्मयाह 25 यिर्मयाह 26 यिर्मयाह 27 यिर्मयाह 28 यिर्मयाह 29 यिर्मयाह 30 यिर्मयाह 31 यिर्मयाह 32 यिर्मयाह 33 यिर्मयाह 34 यिर्मयाह 35 यिर्मयाह 36 यिर्मयाह 37 यिर्मयाह 38 यिर्मयाह 39 यिर्मयाह 40 यिर्मयाह 41 यिर्मयाह 42 यिर्मयाह 43 यिर्मयाह 44 यिर्मयाह 45 यिर्मयाह 46 यिर्मयाह 47 यिर्मयाह 48 यिर्मयाह 49 यिर्मयाह 50 यिर्मयाह 51 यिर्मयाह 52Verse
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यिर्मयाह 49:39 का अर्थ और संदर्भ
पद के भीतर यह भविष्यवाणी उन राष्ट्रों के इतिहास के क्रम में आती है जिनके विरुद्ध यहोवा का दंड-निर्णय चल रहा है। यिर्मयाह पैगंबर ने अरबदेश की प्रतिद्वंद्वी राजधानियों के बारे में ईश्वर की योजना बताई, ताकि यहूदी उस समय के भय और उथलपुथल में निश्चिन्त रहें कि परमेश्वर救री के रास्ते बनाता है और अंतिम दिन के अनुग्रह का लक्ष्य है। 49:39 विशेष रूप से एलाम के प्रति एक वाद देता है कि बंधन से मुक्त करके उन्हें लौटाया जाएगा, जो एक धरोहर-उद्धार का संकेत है।
मुख्य बिंदु
यह वाक्य यह दर्शाता है कि परमेश्वर के निर्णय स्थाई हैं और वह दासत्व की स्थिति से मुक्त करने की योजना रखता है। अंत के दिनों में एलाम को लौटाने की यह बानगी यह दिखाती है कि संसार के शक्तिशाली साम्राज्यों के रहते भी परमेश्वर का उद्धारकार्य चलता रहता है और उसके लोग आशा से जीते हैं।
दो प्रमुख थीमें
गए हुए संदर्भ
1) यिर्मयाह 50–51 में बंधन और नष्टि के भविष्य के चित्र, जो बतलाते हैं कि परमेश्वर कैसे बुराई से परे उठकर उद्धार का रास्ता खोलता है।
2) रेख-उद्धार के विषय पर अन्य.Prophetic passages में यह दर्शाया गया है कि दासता के अंत में स्वतंत्रता आएगी और यहोवा है जो वापसी कराता है।
3) यशायाह 11:11–12 जैसे उद्धार के पुनर्स्थापना के संकेत, जिनमें परमेश्वर के लोग दूसरी बार पृथ्वी पर एकत्र किए जाते हैं।
व्यावहारिक विचार
हमारे रोजमर्रा के जीवन में यह संदेश आश्वस्त करता है कि चाहे परिस्थिति कितनी भी विपरीत क्यों न हो, परमेश्वर के योजना में परिवर्तन नहीं, बल्कि उद्धार की राह तय है। कठिन समय में भी उसकी वाचा पर आशा रखिए; और उसे अपने उद्धार के स्रोत के रूप में पहचाने।
संक्षिप्त समापन
यिर्मयाह 49:39 एलाम के बंधन-छूटकार की भविष्यवाणी के माध्यम से यह दर्शाता है कि परमेश्वर सभी बंधनों को खोलकर उद्धार की वापसी देता है—यह एक समग्र नीतिगत संदेश है: दासता के पथ से मुक्त होकर ईश्वर के नियत पथ पर वापस आना।
cross-references
— यिर्मयाह 50–51 (बंधनों का अंत और उद्धार की योजना के संकेत) – पाठक समझते हैं कि यह भविष्य-वाणी एक विशाल उद्धार-योजना का भाग है।
— यशायाह 11:11–12 (पुनः एकत्रीकरण) – सत्ता के बाहर उद्धार का एक समरूप चित्र, जो एलाम के संदर्भ में प्रतिबिंबित होता है।
— जोएल 3:1–2 (अंत दिनों में फिर से आना) – परमेश्वर के अंतिम दिनों के कार्य की पुष्टि।
नोट: नीचे उद्धृत पंक्तियाँ, यदि उपलब्धं हों, मैथ्यू हेनरी, अल्बर्ट बार्न्स या एडम क्लार्क के सार्वजनिक-डायरेक्ट उद्धरणों से हैं, परन्तु पूर्ण पाठ नहीं दिए जाते।